जीवन गीत

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचनाशिल्प:१६/१४) सब सम्भव है इस जीवन में, जो चाहो हासिल कर लो। रखो हौंसला मेरे साथी, अपने वश मंजिल कर लो॥ कठिन राह पर चलकर देखो, दुख में सुख मिल जाता है। यहाँ मेहनत करने वाला, जीवन गीत सुनाता है॥ धर्म मार्ग पर चलना सीखो, कर्म ध्वजा शामिल … Read more

हे नीलकंठ! जग कष्ट हरो

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ***************************************************************************** (रचनाशिल्प:कुल- ३२ मात्राएं) हे नीलकंठ! करुणामय मेरे, दया सिंधु अब लाज धरो। है आज जगत में त्राहि मची, हे जगदीश्वर! जग कष्ट हरो। तुमने ही जगहित धारण कर विष, कंटक कालन कंठ धरो। अब दीनन के दु:ख दूर करो प्रभु, शंभु हरे-हर, विपद हरो॥ त्राहि मची है आज भुवन में, … Read more

कर दो माँ,कल्याण

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ***************************************************************************** हे माँ,आज शरण में आए, कर दो माँ,कल्याण। आज दु:खी दुनिया है सारी, तेरी शक्ति महान॥ हे माँ,मधुकैटभ विनाशिनी, रक्तबीज कर अंत। महिषमर्दिनि,हे जगदंबा, ‘कोविड’ का कर अंत॥ दुर्गा,काली,चंडी,गौरी, तेरे रूप अनेक। असुर घातिनी,कष्ट हारिणी, शरणागत प्रत्येक॥ दु:खी आज सब लोग तुम्हारे, चरनन शीश झुकाय। करो दुखों का अंत आज … Read more

प्रीत हमें जता जाना

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचना शिल्प:८ वर्ण १३ मात्रिक,मापनी-२११ २१२ २२) साजन जिंदगी मेरी। है अब बन्दगी तेरी॥ गीत मुझे सुना जाना। आप नहीं भुला जाना॥ बादल सा घना छाया। प्रीत यहाँ मुझे लाया॥ राग मल्हार प्यारा है। जीवन गीत न्यारा है॥ यार नहीं सता जाना। प्रीत हमें जता जाना॥ फूल कली … Read more

जीतेगा मानव

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ साहित्यिक गतिविधियाँ,सुन्दर काज। इससे कुसुमित होता,रहा समाज॥ सबके हित की बातें,यहाँ प्रधान। रचनाकारों का है,कार्य महान॥ तुलसी दल के जैसे,सब गुणवान। छोटे और बड़े सब,एक समान॥ सम्मानित सर्जक सब,हैं प्रणम्य। इनके कारण धरती,बनी सुरम्य॥ गीतों में जीवन के,बजे सितार। धरती पर आलोड़ित,होता प्यार॥ दु:ख के दिन में औषधि,सद्साहित्य। हर … Read more

माता रानी

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** माता रानी अम्बिके,कर देना शुभ काज। आए तेरे द्वार पर,रखना सबकी लाज॥ रखना सबकी लाज,शरण में आज तिहारे। देखो हाहाकार,मचा है देश हमारे॥ कहे ‘विनायक राज’,करें क्या समझ न आता। तुमसे है अब आस,बचा लो जग को माता॥ कहना मेरा मान लो,हे जगजननी मात। जोत जलाऊँ आपकी,नव दिन … Read more

राम का नाम करे भवपार

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* (रचना शिल्प:१६ मात्रिक छन्द-आदि में ३,२त्रिकल द्विकल अंत में २,३द्विकल त्रिकल दो-दो चरण सम तुकांत चार चरण का एक छन्द) अवध के प्यारे हैं श्री राम, जगत में न्यारे हैं श्री राम। राम हैं सकल गुणों की खान, करें हम राघव का गुणगान। राम हैं मर्यादा आदर्श, राम लाते जीवन … Read more

ये जीवन इक रंगमंच

रीना गोयल यमुना नगर(हरियाणा) ************************************************************* ये जीवन इक रंग मंच है,अलग-अलग किरदार। कठपुतली के खेल में हुए,हम सब हिस्सेदार। कोई नराधम हुआ धरा पर,चलता कुत्सित राह। ओर निभाये कोई मीत बन,डाल प्रीत की बाँह। नानक सम है सतगुरु कोई,तो कोई घनश्याम। भूमिकाएं सब निभा रहे हैं,क्या रहीम क्या राम। अजब-गजब प्रस्तुतियां देकर,दिल छूते हर बार। … Read more

यह श्रृंगार नहीं जाए

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. प्यारी पृथ्वी जीवन दात्री, सब पिण्डों में,अनुपम है। जल,वायु का मिलन यहाँ पर, अनुकूलन भी उत्तम है। सब जीवों को जन्माती है, माँ के जैसे पालन भी। मौसम ऋतुएँ वर्षा,जल,का करती यह संचालन भी। सागर हित भी जगह बनाती, द्वीपों में यह बँटती है। पर्वत नदियाँ … Read more

पिता हैं ईश्वर रूप

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* (रचना शिल्प:२२ मात्रा, १२,१० पर यति। यति से पूर्व व पश्चात त्रिकल व अंत में गुरु वर्ण) पिता है सबके पूज्य,मान उनका करो। सदा वही त्याग करें,ध्यान उनका धरो। सुख और दु:ख में रहे,संग परिवार के। निस्वार्थ प्यार करे,काम आय सबकेll पिता हैं ईश्वर रूप,धीर गंभीर है। खुद सदा दुःख … Read more