भागम-भाग वाली जिन्दगी में प्रेमपूर्वक होली

  जीवन और रंग,… बीते साल होली के अवसर पर मुम्बई वाले भवन-समूह में आयोजित सभी कार्यक्रमों में भागीदारी निभाने का अवसर मिला। उसी को याद कर बता रहा हूँ कि, जनवरी माह में वहाँ उद्यान के चारों तरफ लगे नारियल के पेड़ से नारियल के साथ उसकी अनउपयुक्त डालियाँ उतार नारियल तो बाजार से … Read more

दोनों तरफ़ के दरवाजे बंद कर दे…

सुरेन्द्र सिंह राजपूत ‘हमसफ़र’देवास (मध्यप्रदेश)****************************************** जीवन और रंग… बात उन दिनों की है जब मैं १९८४ में आईटीआई करके गाजरा गियर्स कम्पनी (देवास) की नौकरी में लगा था। नया शहर था, मैं वहाँ के त्यौहारों की परम्पराओं से ज़्यादा परिचित नहीं था। वहाँ आने के पश्चात सबसे पहला त्यौहार होली आया, लेकिन कम्पनी में होली … Read more

प्राकृतिक छटा

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन.. भाग-१० होटल शेरेटन एकदम समुद्र किनारे बना हुआ है। फिजी देश का सबसे श्रेष्ठ उत्तम होटल माना जाता है। पाँच सितारा सुविधाएं अपनी जगह हैं, लेकिन वहां का प्राकृतिक सौष्ठव देखते ही बनता था। हमारे कक्ष की बड़ी खिड़कियाँ खोलते ही सामने समुद्र तट होता था। सबसे अच्छी बात यह थी … Read more

विमोचन का एक मंच था

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-८ १२वें ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ में भारत से गए साहित्यकारों में अपनी पुस्तकों का विमोचन कराने का भी उत्साह देखने लायक था। पृथक से जहां मीडिया कक्ष की व्यवस्था थी, वहीं पुस्तकों के विमोचन का एक मंच बना हुआ था। मुझे भी २ सत्रों में अलग-अलग समय पर अनेक साहित्यकारों की … Read more

परंपराओं का आग्रह भी और सम्मान भी

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-७ ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ के उद्घाटन, समापन और अलंकरण सत्रों में फिजी और भारत के वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। फिजी के राष्ट्रपति ऊपर कोट पर टाई पहने नीचे घुटनों तक एक वस्त्र पहने थे, जैसा बेटियां स्कर्ट के रूप में पहनती हैं। सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात यह रही कि, … Read more

भयावह से दिखने वाले चेहरों के पीछे छुपी कोमलता…

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन भाग-६ कहते हैं कि कला मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। साहित्य और कला न केवल देशों की सीमाओं को पार कर जाते हैं, बल्कि वह हृदय की सीमाएं पार कर भी एक-दूसरे के हृदय में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। कलाकारों को एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होना ही चाहिए। … Read more

स्नेहसिक्त आतिथ्य की परम्परा उनके रक्त में

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-५.. फिजी में मुक्त समय में हमारे लिए सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होते थे वहां के परंपरागत जनजातिय वेशभूषा वाले स्थानीय मूलनिवासी। उन लोगों का अत्यधिक स्नेहिल व्यवहार हम सबका हृदय जीतने में सक्षम था। विश्व के सर्वाधिक आनंददायक देश के रूप में चिन्हित इस देश में सचमुच यदि कहीं आनंद … Read more

वह भ्रम पहली बार टूटा

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-४.. इस पूरी यात्रा में एक बात सबसे अधिक प्रभावित कर गई कि, जिन राजनेताओं को हम अत्यधिक अहंकारी मान लेने का भ्रम पाल लेते हैं, वह भ्रम पहली बार हमारे पूरे प्रतिनिधिमंडल का टूटा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी, विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन जी, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा … Read more

वैश्विक शान्ति के लिए हिन्दी बने विश्वभाषा

डॉ. मनोहर भण्डारीइंदौर (मध्यप्रदेश)*********************************** फिजी यात्रा-विश्व हिंदी सम्मेलन… फिजी के नांदी शहर में आयोजित बारहवें ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन’ को सार रूप में देखें तो ऐसा ध्वनित और स्पष्ट प्रतीत होता है कि फिजी सरकार और भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दी को विश्वभाषा बनाना रहा है। फिजी के नागरिकों … Read more

इच्छा को दबा नहीं पाया

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन.. भाग-३ जिस वाद्य की चर्चा मैंने पिछली जानकारी में की थी, उसे बजाने की इच्छा को मैं भी दबा नहीं पाया। मैं जानता हूँ मैं कोई भी वाद्य नहीं बजा पाता। न ताल का ज्ञान है, ना सुर का, लेकिन कभी-कभी कुछ चीजें बच्चों की तरह मस्तीखोरी में हो जाती है। … Read more