भयावह से दिखने वाले चेहरों के पीछे छुपी कोमलता…

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन भाग-६ कहते हैं कि कला मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। साहित्य और कला न केवल देशों की सीमाओं को पार कर जाते हैं, बल्कि वह हृदय की सीमाएं पार कर भी एक-दूसरे के हृदय में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। कलाकारों को एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होना ही चाहिए। … Read more

स्नेहसिक्त आतिथ्य की परम्परा उनके रक्त में

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-५.. फिजी में मुक्त समय में हमारे लिए सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होते थे वहां के परंपरागत जनजातिय वेशभूषा वाले स्थानीय मूलनिवासी। उन लोगों का अत्यधिक स्नेहिल व्यवहार हम सबका हृदय जीतने में सक्षम था। विश्व के सर्वाधिक आनंददायक देश के रूप में चिन्हित इस देश में सचमुच यदि कहीं आनंद … Read more

वह भ्रम पहली बार टूटा

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-४.. इस पूरी यात्रा में एक बात सबसे अधिक प्रभावित कर गई कि, जिन राजनेताओं को हम अत्यधिक अहंकारी मान लेने का भ्रम पाल लेते हैं, वह भ्रम पहली बार हमारे पूरे प्रतिनिधिमंडल का टूटा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी, विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन जी, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा … Read more

वैश्विक शान्ति के लिए हिन्दी बने विश्वभाषा

डॉ. मनोहर भण्डारीइंदौर (मध्यप्रदेश)*********************************** फिजी यात्रा-विश्व हिंदी सम्मेलन… फिजी के नांदी शहर में आयोजित बारहवें ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन’ को सार रूप में देखें तो ऐसा ध्वनित और स्पष्ट प्रतीत होता है कि फिजी सरकार और भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दी को विश्वभाषा बनाना रहा है। फिजी के नागरिकों … Read more

इच्छा को दबा नहीं पाया

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन.. भाग-३ जिस वाद्य की चर्चा मैंने पिछली जानकारी में की थी, उसे बजाने की इच्छा को मैं भी दबा नहीं पाया। मैं जानता हूँ मैं कोई भी वाद्य नहीं बजा पाता। न ताल का ज्ञान है, ना सुर का, लेकिन कभी-कभी कुछ चीजें बच्चों की तरह मस्तीखोरी में हो जाती है। … Read more

‘बुलाsssss’

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-२.. फिजी की लगभग २० घंटे की यात्रा में मलेशिया के कुआलालमपुर में एक विराम हुआ। उस २ घंटे के विराम ने आधी यात्रा की थकान उतार दी। फिर हम लोग दूसरे भाग की यात्रा के पश्चात पहुंचे सीधे फिजी।विमानतल पर परंपरागत ढंग से स्वागत ने अभिभूत किया। सीधे पहुंचे हमारे … Read more

साथ स्मरणीय बन गया

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन भाग-१ इंदौर से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही आ. कुमुद शर्मा दीदी और युवा कवि प्रिय अमित शर्मा की टोली मिल गई। फिर तो मिले २७५ में से शायद १५० से अधिक विद्वतजन पारिवारिक परिचित थे। भावी आनंद की एक झलक इन सबको देखकर आभासित होने लगी। विमान में सांची विवि की … Read more

आमजन को कब मिलेगा हक ?

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** शहरातियत की धक्कम-पेल, ठेलम-ठेल, रेलम-रेल और तिकड़मबाजी तो आज से पहले खूब देखी और सुनी थी पर अस्पताल में भी ऐसा परिदृश्य होता होगा, कभी सोचा नहीं था। हर कोई बस इसी जद में लगा है कि मेरा नम्बर पहले लगना चाहिए। सब्र रखने का शायद किसी को वक्त ही नहीं … Read more

ये क्या कम है !

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** यदि आप नहीं होते तो…(शिक्षक दिवस विशेष)…. यदि आप नहीं होते तो आदर-सम्मान की परिभाषा कहाँ से सीख पाते एवं ज्ञानार्जन में वृद्धि भी नहीं हो पाती। जो सीखा गया है, उसका पालन करना चाहिए। बच्चों ने अपने शिक्षक का आदर-सम्मान भी करना चाहिए। ज्ञान में ही आदर-सम्मान जुड़ा होता है, जिसे … Read more

स्वर्ग होगा तो ऐसा ही होगा

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** केदारनाथ यात्रा… गगन को चीरती उतंग धवल पर्वत, पर्वतों के सीने चीर बहती अलकनन्दा, मंदाकिनी। उछलती, लपकती, छलकती गंगा, यमुना, बड़ी नदियों से जल्दी मिलने को आतुर कितनी छोटी नदियाँ, झरने, हिम नदियाँ। एक-दूसरे से ऊँचे होने की होड़ करते चीड़, देवदार, हिमालयन वृक्ष और पादप…।शब्दातीत, नैसर्गिक सुंदरता समेटे उत्तराखंड में पहुँच … Read more