किसान का दर्द

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** हल चलाते किसान,परिश्रम खूब करते हैं, लेकिन सेठ साहूकार अपनी तिजोरी भरते हैं। कितनी भी मुसीबत हो किसान धैर्य धरते हैं, कौन समझे किसान का दर्द,वे कितना तड़पते हैं॥ स्वयं भूखे रहकर,औरों को भोजन कराते हैं, परिवार का पालन करते,बच्चों को पढ़ाते हैं। धूप हो या वर्षा हो,परिश्रम निरंतर … Read more

क्योंकि उनका मन ही नहीं…

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** एक बार फिर सजेगी आँसूओं की सेज मेरी, एक बार फिर रोऊँगा याद में उनकी… क्योंकि,उनका मन ही नहीं-उनका हूँ मैं, एक बार फिर टूट गए सारे सपने मेरे मन के। एक बार फिर बरसात होगी, बादल आँखों में झलक रहे हैं… घाव बढ़ते ही जा रहे हैं इस तन के। … Read more

सच्ची दीवाली

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** भाइयों आने वाली है धनतेरस, पास हो पैसे तो लो इसमें रस ना हो पैसे तो फिर तू तरस, कहूँ मैं हर परिस्थिति में तू हँस। करते हो भाई तुम यदि व्यापार, सजाए होंगे सामानों से दरबार खूब होगा इस दिन तेरा कारोबार, मनाएंगे खुशी ये सब सपरिवार। … Read more

लड़की…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ करो पोषण- लड़की पर कभी न हो शोषण। लड़की पढ़े- नित नये सपनों को वह गढ़े। करो दुलार- लड़कियों पर न हो अत्याचार। न करो भूल- लड़की नही होती चरण धूल। न हो व्यापार- क्यों लुटती लड़की सरे बाज़ार। परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी … Read more

परिवार में है ताकत

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** जीवन में है भागा-दौड़ी, मुश्किल से मिलती फूटी-कौड़ी व्यस्तता के इस दौर में, मत भूलिए आचार-विचार करिए ऐसा कर्म सदा कि, खुश रहे जगत-परिवार इस पर हो जीवन न्योछावर, परिवार में ओ है पावर(ताकत)। मत तोड़िए परिवार से नाता, वहाँ बसते हैं जीवन के दाता भाई- बहन-भाभी और माता, इन्हें … Read more

बंद करो ‘बिग बॉस’

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* खुले बदन की नारी, लगने लगी इन्हें कंचन। जबसे आया है ‘बिग बॉस’ सा मेरे देश में मनोरंजन। बिन सात फेरों के साथ में सोने का यह देते काम। क्या इस देश में हुए माँ, सीता और मर्यादा वाले राम। मनोरंजन के नाम पर परोस रहे है यह हवस। नेता … Read more

करवा चौथ

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** करवा चौथ मनाती सुहागन, सलामत रहे कहे रब से रे साजन। कार्तिक महीने का चंदा यह प्यारा, छलनी से देखा चाँद दोबारा। करनी तसल्ली अब पूजा करूंगी, व्रत का अपने परायण करूंगी। पिन्नी का भोग चाँद को लगाया, सुनाई कहानी पियूंगी अब पानी। आज सिंगार में कमी नहीं है, … Read more

शरद का चाँद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** चंदा देता चाँदनी,देता शीतल नेह। पुलकित तन हर एक के,उल्लासित है देह॥ शुभ्र ज्योत्सना है मधुर,छेड़े मधुरिम राग। ऐ मेरे अनुराग अब,क्यों कर ना तू जाग॥ अमिय बरसता है सतत्,अब तो सारी रात। प्रकृति दे रही ऐ ‘शरद’,यह नेहिल सौगात॥ उजला सबका तन हुआ,मन भी निखरा ख़ूब। हर इक … Read more

था वो काठियावाड़ी

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आओ सुनाऊं बच्चों, गाथा तुम्हें न्यारी, जिसने दिया स्वराज,था वो काठियावाड़ी । कर में थी एक लाठी,तन पर थी लंगोटी, थी एक भुजा लम्बी कुछ एक थी छोटी… था भाल बहुत ऊंचा सर पर न बाल थे, बच्चों बड़े अदभुत उन बापू के हाल थे। देखी न कभी ऐसी प्रतिमा यहां … Read more

अब न रूठना

अजय जैन ‘विकल्प’ इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** तुमको गम नहीं,उतना रूठ जाने का, जितना है हमको,किसी के न मनाने का। हम सोचते थे अक्सर,आओगे तुम मनाने, तुमने सोचा मना लेंगे,कौन से हैं बेगाने… आएंगें तो कहेंगे कि-अब न रूठना, हम भी कह देंगे,-दिल न दुःखाना। मनाकर उन्हें जो ले आएंगे हम, हर ओर होगा खुशी का मौसम…। … Read more