किसान का दर्द
डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** हल चलाते किसान,परिश्रम खूब करते हैं, लेकिन सेठ साहूकार अपनी तिजोरी भरते हैं। कितनी भी मुसीबत हो किसान धैर्य धरते हैं, कौन समझे किसान का दर्द,वे कितना तड़पते हैं॥ स्वयं भूखे रहकर,औरों को भोजन कराते हैं, परिवार का पालन करते,बच्चों को पढ़ाते हैं। धूप हो या वर्षा हो,परिश्रम निरंतर … Read more