पत्थर दिल
विजयसिंह चौहान इन्दौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** अब जा के, मेरे मन को आया,करार जब मैंने, अपने दिल को पत्थर पाया। है बहुत फिक्रमंद,और चाहने वाले,मेरे न जाने क्यूँ, मेरे दिल मे अभिमान आया,जो अपने दिल को पत्थर पाया। हो जाती है, मुहब्बत एक बेजुबाँ से फिर क्यों मैंने हँसी में, किसी का दिल दुखाया। अभिमान,गुरुर और बेतुकी … Read more