घर बनाना बच्चों,मकान नहीं

काजल सिन्हा इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************************* घर बनाना बच्चों,पर मकान नहीं, बारादरी इतनी लंबी ना बनाना कि हम हँसें तो तुम सुन ना सकोl घर बनाना बच्चों… दरो-दीवार इतनी सख्त ना बनाना, कि हमारे कहकहे दब जाएंl घर बनाना बच्चों… आँगन ऐसा बनाना कि साथ बैठ पाएं, हाथों में एक-दूसरे का हाथ रख पाएl घर बनाना बच्चों… … Read more

कृष्ण

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो सुंदर सलोना प्यारा श्याम है। ब्रज में रहता उसका ही धाम है। वो गोकुल की गलियां भी उसकी है, मोहन,राधे कृष्ण उसका ही नाम है। मोर मुकुट से सजा मुखड़ा और प्यारा। गोपियों के प्रेम में जग उसका सारा। आँखों में काजल सांवला रंग उसका, कान्हा की सुंदरता से जग … Read more

मौसम

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* तीन ऋतु से मिलकर बना मौसम, जिसमें होता सभी लहरों का संगम। इसमें है बहती हवा का मंजर, जिससे आनंदित होता है सारा शहर। कभी है सूखा पतझड़ तो कभी है सावन, कभी है पत्तों की झरझर तो कभी हवाओं की सनसन। चारों दिशाओं में फैली हवाओं की खुशबू, जिसमें … Read more

रंग एक ही है

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** १२ वीं कक्षा उत्तीर्ण कर रविन्द्र सोशल मीडिया की दुनिया में प्रवेश कर चुका था। जहाँ उसने देश-दुनिया,रिश्ते, समाज,धर्म,कर्म तथा राजनीतिक मुद्दे जैसी सारी चीजें देख-सुन ली थी और इसी सोशल मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में रम जाने के कारण रविन्द्र हिन्दू विरोधी पोस्ट और खबरों को देखते-देखते अपने … Read more

मैं स्त्री हूँ,पुरुष नहीं बनना

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** मैं स्त्री हूँ नदी की तरह बहती हूँ, मुझे सागर नहीं बनना। मैं महीन रेत की कण, जो करती नीड़ का निर्माण मुझे चट्टान नहीं बनना। मैं हरी-भरी सुन्दर धरती, जो पालती पूरा विश्व मुझे शून्य आसमान नहीं बनना। मैं हूँ सीता,द्रोपदी,अहिल्या जिनका किया तिरस्कार, ऐसे राम,पांडव,गौतम… मुझे नहीं बनना। मैं … Read more

देखा है

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’  छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ******************************************************************************************** हारना तीरगी का देखा है। हौंसला आदमी का देखा है। मंजिलों की लगन में राही ने, रास्ता कब किसी का देखा है। राह की मुश्किलों से लड़-लड़ के, हमने बढ़ना नदी का देखा है। धूप में बेचता है वो पानी, जीस्त में तिश्नगी का देखा है। सौंपकर … Read more

दर्द सारे सह गए

सुदामा दुबे  सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* मौन से रहे कभी तो, दिल की कभी कह गए। हम भी अपने दर्द सारे, हँसते-हँसते सह गए। मुरझाये नेह सुमन, जिंदगी की धूप में, साजिशों की लहरों में, रिश्ते सभी बह गए। वक्त की चलीं ऐसी, बेरहम-सी आँधियाँ, सपनों के महल सारे, देखते ही ढह गए। गैरों की बातों का, … Read more

चाँद निकल आया है

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* देखो चाँद निकल आया है, मुंडेर से अपलक झांके सितारों का हार लिए, जूगनू की बिन्दी पहने बादलों का घूँघट किए, रजनी दुल्हन का श्रृंगार निरख-निरख के अन्तः से तारों का मन ललचाया है, देखो चाँद निकल आया है। ओस की बारात सजी है, मन्थर हवा का गीत पत्तियों … Read more

सच का वृक्ष

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** सच का वृक्ष, सूखने लगा आज- संभल जाओl अपनों बीच, कितने धोखेबाज- ध्यान लगाओl जरूरत है, झूठ का पूर्णनाश- आगे तो आओl सच का बीज, रख अपने हाथ- उगाते जाओl

पक रही है कविता

श्रीमती संतोष श्रीवास्तव भोपाल (मध्यप्रदेश)  *********************************************************************** कविता जिंदगी की, अनिवार्य जरूरत हैl वह सुनती है, आत्मा की आवाज देखती है…l निर्दयी,निर्मम आतंक से एक ही पल में मिटते, पृथ्वी को दी हर बन्दे के रूप में ईश्वर की सबसे बेशकीमती सौगात कोl बंदूकों की होड़ बमों का जखीरा, आत्मघाती धमाकों से ढेर हुई इंसानियत कोl … Read more