मालदीवःभारत के लिए गहन चिंता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारतीयों को यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि हमारे पड़ौसी देश मालदीव में आजकल एक जबर्दस्त अभियान चल रहा है,जिसका नाम है- ‘भारत भगाओ अभियान!’ भारत-विरोधी अभियान कभी-कभी नेपाल और श्रीलंका में भी चलते रहे हैं लेकिन इस तरह के जहरीले अभियान की बात किसी पड़ौसी देश में पहली बार सुनने में … Read more

हम वीरों की धरती

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* “ऐ! रावी ले लो!““नहीं, रे! नहीं““ऐ! व्यास ले लो!““नहीं, रे! नहीं““नदियाँ पाकिस्तान को अंग्रेज़ों ने ज़बरन दीं, वापिस लो!”“हिन्दुस्तान की मिट्टी की क़सम,हम शहीद सैनिक हैं,अपने वतन का ज़र्रा-ज़र्रा खींच ले आएँगे वापिस।”“सही कहा तुमने,अपने देश के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं,बशर्ते सरकारें ठीक से चलें तभी तो…।““हाँ,यह सोचने … Read more

सर्दी में गुनगुनी धूप बड़ी फायदेमंद

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** सभी जानते हैं कि स्वस्थ हड्डियों और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए विटामिन डी अति आवश्यक है। सभी विशेषज्ञों ने धूप को विटामिन डी का न केवल मुख्य स्रोत,बल्कि बुढ़ापे में अत्यन्त प्रभावकारी बताया है। हालाँकि,कुछ खाद्य पदार्थों से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है लेकिन अनुभव के आधार … Read more

शाकाहार बन रहा विश्व-व्यापी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* क्या आपको यह जानकर आनंद नहीं होगा कि दुनिया के सबसे ज्यादा शुद्ध शाकाहारी लोग भारत में ही रहते हैं। ऐसे लोगों की संख्या ४० करोड़ से ज्यादा है। ये लोग माँस,मछली और अंडा वगैरह बिल्कुल नहीं खाते। यूरोप,अमेरिका,चीन,जापान और मुस्लिम देशों में कई बार यह वाक्य सुनने को मिला कि ‘हमने … Read more

‘धूूप की मछलियाँ’ भाव-संवेदनाओं की कहानियाँ

विजय कुमार तिवारी************************* समीक्षा करते समय केवल सारांश प्रस्तुत करना सम्यक नहीं है। रचना के पात्रों की परिस्थितियाँ, उनके संघर्ष,उनकी संभावनाएं,सुख-दु:ख,रचनाकार की प्रतिबद्धता और समझ सब तो परिदृश्य में उभरते ही हैं। लेखक की संघर्ष-चेतना,प्रतिबद्धता, भाषा और शैली के संस्कार उभरने ही चाहिए।हिन्दी साहित्य में प्रवासी भारतीयों ने कम योगदान नहीं किया है और विदेशी … Read more

हिन्दी में ‘निर्णय’ का संकल्प:न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त

प्रो. अमरनाथकलकत्ता(पश्चिम बंगाल) ******************************** इटावा (उ.प्र.) में जन्मे,इटावा तथा इलाहाबाद में पढ़े-लिखे न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त (१५ जुलाई १९३०-२३ जनवरी २०१३) हिन्दी में फैसला सुनाने वाले अन्यतम न्यायाधीश के रूप में विख्यात हैं। १९७७ में वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुए। हिन्दी में कार्य करने और निर्णय देने की प्रेरणा उन्हें … Read more

इस गणतंत्र दिवस की महक सबसे न्यारी

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** गणतंत्र दिवस विशेष…. भारतीय संस्कृति और अस्मिता के साथ-साथ सभी भारतवासियों,सभी भारत-प्रेमियों,भारतीय भाषा प्रेमियों और भारतीय गीत-संगीत के प्रेमियों के लिए यह गणतंत्र दिवस बहुत ही विशेष है। जो अब तक न हुआ अब हो रहा है,यह देख कर सभी भारतवासियों का सीना आज गर्व से चौड़ा हो रहा है। पश्चिम … Read more

गण की भाषा कब होगी गणतंत्र की भाषा ???

डॉ.विनोद बब्बरनई दिल्ली **************************************************** गणतंत्र दिवस विशेष…. दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सांस्कृतिक झांकी प्रस्तुत की जा रही है तो ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के माध्यम से हम इस देश की बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोले-समझे-पढ़े-लिखे जाने वाली भाषा के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करते हैं। गणतंत्र दिवस पर पूछता है भारत… कि,गण … Read more

मानसिक स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** हमारा शरीर बहुत ही महत्वपूर्ण मशीन है। जिस प्रकार हम अपनी कार,मोटर साइकिल या अन्य मशीनों की देखरेख करते हैं,उसमें ऑइलिंग,ग्रीसिंग और सर्विसिंग कराते रहते हैं,लम्बी यात्रा के समय अपना वाहन सही रखते हैं,उसी प्रकार यह शरीर भी सब कुछ चाहता है यानी पोषण,पाचन और आराम। सम दोषः समाग्नि सम धातु मलाः क्रियाः … Read more

आत्मगौरव भी भरता है गणतंत्र दिवस

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** गणतंत्र दिवस विशेष….. हम सभी जानते हैं कि स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत को अंग्रेजों की लंबी गुलामी से आजादी मिली थी,जबकि गणतंत्र दिवस के दिन भारत गणतंत्र देश बना,क्योंकि उसी दिन से ‘भारत सरकार अधिनियम १९३५’ की जगह भारत का लिखा हुआ संविधान लागू हुआ। अर्थात पूर्ण स्वराज दिवस (२६ … Read more