सरकारी विद्यालय बेहतर बनाम निजी

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** ये हमेशा वाद-विवाद का प्रश्न रहा है कि सरकारी विद्यालयों की पढ़ाई निजी विद्यालयों से बेहतर क्यों नहीं होती है। सरकारी विद्यालयों में निजी विद्यालयों से कम सुविधाएं क्यों उपलब्ध रहती है ?दरअसल,सरकारी विद्यालय वो होते हैं,जिन पर पूरा नियंत्रण सरकार का होता है। यानि बच्चों केपाठ्यक्रम से लेकर अध्यापक की नियुक्ति भी … Read more

नेपाली राजनीति अधर में

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* नेपाल की सरकार और संसद एक बार फिर अधर में लटक गई है। राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने अब वही किया है,जो उन्होंने पहले २० दिसंबर को किया था,याने संसद भंग कर दी है और ६ माह बाद नवंबर में चुनावों की घोषणा कर दी है। याने प्रधानमंत्री के.पी. ओली को कुर्सी में … Read more

वर्तमान में नैतिकता की बहुत आवश्यकता

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************** यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किंतु प्रगति के इस उजले पहलू के साथ एक धुंधला पहलू भी है,जिससे हम छुटकारा चाहते … Read more

संग्रह का निहित स्वार्थ छोड़ना होगा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************** आज संसार में मानवीय मृगतृष्णा सागरवत मुखाकृति को अनवरत धारण करती जा रही है। एतदर्थ मनुष्य साम,दाम,दंड,भेद,छल,प्रपंच, धोखा,झूठ,ईर्ष्या,द्वेष,लूट,घूस,दंगा,हिंसा,घृणा और दुष्कर्म आदि सभी भौतिक सुखार्थ आधानों को अपना रहे हैं। सतत् प्राकृतिक संसाधनों, जैसे-भूमि खनन,वन सम्पदा का कर्तनt,पहाड़ों को काटना,नदियों का खनन एवं समुद्रों को भी प्रदूषित करने से मनुष्य … Read more

आचार्य द्विवेदी का संपूर्ण साहित्य मानव की प्रतिष्ठा का प्रयास

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ जिसमें सारे मानव सभ्यता को सुंदर बनाने की कल्पना की जाती है,उसे ही तो साहित्य कहते हैं। साहित्य की हर महान कृति अपनी ऐतिहासिक सीमाओं का अतिक्रमण करने की क्षमता रखती है। अपनी संस्कृति के स्मृति संकेतों,मिथकों और भाषाई प्रत्यय से गुजरते हुए हर कविता,हर निबंध,हर उपन्यास मनुष्य के समग्र और … Read more

अनंत ज्ञान के धनी थे आदि शंकराचार्यजी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** केरल के मालाबार में कालड़ी नामक स्थान पर साधारण ब्राह्मण परिवार मेंं वैशाख माह की शुक्ल पंचमी के दिन जन्मे अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि गुरु शंकराचार्य जी संस्कृत के उद्भट प्रस्तोता, उपनिषदों की व्याख्या करने वाले,महान दार्शनिक व सनातन धर्म के सुधारक थे। बहुत मुश्किल से उनको अपनी माताजी से … Read more

मेला और तुलसी का पौधा

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** बात उन दिनों की है जब मेरी उम्र लगभग १२-१४ वर्ष रही होगी। हमारे प्रयागराज में हर साल माघ मेला लगता है। हम संयुक्त परिवार में ही रहते थे। मेरी चचेरे भाई से बहुत पटती थी। अब भी पटती है। हम दोनों बाहर साथ साथ ही आते-जाते थे। जनवरी-फरवरी में हमारे प्रयागराज में … Read more

कोरोना:जीतने के भाव से एकजुट होकर लड़ना होगा

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** कोरोना से जारी देशव्यापी महायुद्ध में जहां समाज इंसानियत और परस्पर मदद की कई मिसालें पेश कर रहा है,वहीं कोरोना युद्ध में जुटी मशीनरी और कोरोना योद्धाओं के बीच ही कर्कश मतभेद इस लड़ाई को न सिर्फ कमजोर कर रहे हैं,बल्कि पहले ही दहशत में जी रहे आम आदमी की हिम्मत भी … Read more

परिवार बिना जीवन की कल्पना कठिन

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************* परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है,जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है और जिसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारेपूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार,मर्यादा,सम्मान,समर्पण,आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-सम्पन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है,उसी से … Read more

प्रकृति प्रदत्त संस्थान है ‘घर-परिवार’

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… संसार की रचना में मनुष्य को परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ रचना माना गया है। मनुष्य ने अपनी श्रेष्ठता को साबित भी किया है,परन्तु मनुष्य अकेला नहीं,एक परिवार के रूप में माता-पिता के साथ आता है और माता की कोख उसका प्रथम घर होती है। इस प्रकार प्रकृति स्वयं घर-परिवार की रचना … Read more