हिन्दी का स्वरुप जनभाषा का हो

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** हिंदी दिवस विशेष….. ‘हिन्दी दिवस’ १४ सितम्बर को हर साल मनाया जाता है। इस दिन बड़ी धूमधाम से हिन्दी की विरुदावली गायी जाती है। कहीं हिन्दी सप्ताह मनाया जाता है तो कहीं हिन्दी पखवाड़ा। विद्यालयों के छात्र-छात्राओं में लेख,श्रुतिलेखन, काव्यपाठ आदि की प्रतियोगिताएँ होती हैं और सफल होनेवालों को … Read more

हर दिन को ‘हिंदी दिवस’ बनाना होगा

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) *************************************************** हिंदी दिवस विशेष….. सितम्बर की हवाओं में न जाने कौन-सी मादकता है कि हिंदी के दिवाने झूमने लगते हैं। देश के कोने-कोने से समाचार आने लगते है कि हिंदी को बढ़ावा मिले इसके लिए महानगर,शहर,गाँव,गली, मुहल्लों में संगोष्ठी-कवि गोष्ठी की जा रही है। लोगों को हिंदी के प्रति आकर्षित करने के लिए … Read more

हमेशा अपनी भाषा की उन्नति के लिए कार्य करना होगा

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* हिंदी दिवस विशेष….. १४ सितम्बर को हमारे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। १९४७ में जब भारत अंग्रेजी हुकूमत से आज़ाद हुआ तो,देश के सामने एक बड़ा सवाल भाषा को लेकर था, क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियां बोली जाती थी। आज़ाद भारत का संविधान २६ जनवरी १९५० को … Read more

‘माथे की बिंदी’ बनाने में आम हिन्दी सुगम राह

कर्नल डॉ. गिरिजेश सक्सेना ‘गिरीश’भोपाल(मध्यप्रदेश)************************************************* हिंदी दिवस विशेष….. हिन्दी देश के माथे की बिंदी यह वाक्य या कहूँ तो यह कथ्य मैं अपने होश के साठ-पैसठ वर्षों से सुन रहा हूँ,गौरवान्वित भी रहा हूँ और आज भी हूँ। कभी-कभी परन्तु यह गौरव मुझे थोथा या ढकोसला सा लगता है। सोचा,बहुत सोचा,हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है अतः … Read more

नई शिक्षा प्रणाली में मातृभाषा का बेहतर योगदान

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* नई शिक्षा प्रणाली में मातृभाषा को सम्मिलित करने का मुख्य उद्देश्य उसे सशक्त बनाना है,जो लुप्त होने की कगार पर है। इससे उसे नया जीवनदान मिलेगा और बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में सहायता मिलेगी।सर्वविदित है कि नई शिक्षा नीति-२०२०को कैबिनेट की स्वीकृति मिल चुकी है। … Read more

रीति- रिवाज

मधु मिश्रानुआपाड़ा(ओडिशा)************************************************************** “छुट्टियों में बच्चे आए हुए थे,और संयोगवश बड़े भैया का भी फ़ोन आ गया कि,अगले हफ़्ते प्राची को देखने लड़के वाले आ रहे हैं,तुम सब लोग आ जाओ…अगर सब-कुछ ठीक रहा तो एक छोटी-सी रोके की रस्म भी कर देंगे..और इसी बहाने सब लोगों का साथ में रहना भी हो जाएगा…!” सासू माँ … Read more

शिक्षा की भाषा और भाषा की शिक्षा

प्रो. गिरीश्वर मिश्रदिल्ली********************************************************** जीवन व्यापार में भाषा की भूमिका सर्वविदित हैl मनुष्य के कृत्रिम आविष्कारों में भाषा निश्चित ही सर्वोत्कृष्ट हैl वह प्रतीक(अर्थात कुछ भिन्न का विकल्प या अनुवाद!)होने पर भी कितनी समर्थ और शक्तिशाली व्यवस्था है,इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि,जीवन का कोई ऐसा पक्ष नहीं है जो भाषा से अछूता होl … Read more

गुलाब को कुछ और कह लें…वह गुलाब ही रहेगा!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ********************************************************** अच्छा हुआ जो शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में जिला संग्राहक(कलेक्टर)का पदनाम बदलने की एक गैरजरूरी कोशिश को तिलांजलि दे दी। सरकार ने इस काम के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को भी भंग कर दिया। दरअसल,यह एक अनावश्यक मशक्कत थी,जो पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार करना चाहती थी,क्योंकि संग्राहक पदनाम बदलना न तो ‘औरंगजेब रोड’ … Read more

अर्थ-संकट के बादल

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************** भारत की अर्थ-व्यवस्था अब अनर्थ-व्यवस्था बनती जा रही है। इससे बड़ा अनर्थ क्या होगा कि,सारी दुनिया में सबसे ज्यादा गिरावट भारत की अर्थ-व्यवस्था में हुई है। कोरोना की महामारी से दुनिया के महाशक्ति राष्ट्रों के भी होश ठिकाने लगा दिए हैं,लेकिन उनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में १०-१५ प्रतिशत से ज्यादा की … Read more

पितृपक्ष:श्राद्ध-कर्म में स्वकल्याण अवसर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** पितृपक्ष २ सितम्बर (२०२०) से प्रारंभ हो चुका है। यह महालयारंभ,प्रतिप्रदा श्राद्ध १ तदनुसार भाद्रपद शुक्ल १५ से शुरू हुआ और १७ सितम्बर आश्विन कृष्ण ३०,२०७७ को समाप्त होगा।पितृ पक्ष या पितरपख,१६ दिन की वह अवधि है,जिसमें हिन्दू लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिए … Read more