आबादी-बर्बादी

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* बढ़ी आबादी,सब हैं परेशाननिकले हल। वक़्त रहते,वक़्त को पहचानरुके बर्बादी। हुए शराबी,खोया घर संसारदुःख की बात। सुनते सभी,गुनते कभी नहींयही ख़राबी। समझें जब,ज़िंदगी की क़ीमतजीना बदलें॥ परिचय–डॉ. आशा वीरेंद्र कुमार मिश्रा का साहित्यिक उपनाम ‘आस’ है। १९६२ में २७ फरवरी को वाराणसी में जन्म हुआ है। वर्तमान में आपका स्थाई … Read more

एक शाम

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* शहरों की शामों में,इमारतों की एक-एक मंजिल सेउतरती धूप…! गाँवों की शामों में,खेत-खलिहानों में फैलीसंकुचित होती धूप…! कुछ तो है,दोनों के बीच बंधा हुआ युगों सेआओ खोजें,कुछ नया करने की चाहपरस्ती हुई धूप में…! शायद,एक शहर की वैज्ञानिक शामया एक गाँव की सुनहरी शाम,चहक उठे यह कहकर-‘दोनों में ऊर्जा अक्षुण्ण है,विपरीत … Read more

विश्व भ्रमण करती है रचना

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* वक्त और जज्बातों का जब मिलन होता है,तभी नई रचनाओं का उद्गम होता हैजन्मती हैं वो भावनाओं के गर्भ से,झूलती है वह शब्दों के झूले मेंबढ़ती है वह ख्वाबों की ताबीर लिए,चलती है वो सुरताल की झंकार लिए।किन शब्दों में करूं मैं उनकी अर्चना,पाँव नहीं है पर विश्व भ्रमण करती है रचना॥ कभी … Read more

रंग लाएगी

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** निगाहों का मिलना ही,प्यार में काफी नहीं होतादिल का दिल से मिलना,बहुत जरूरी होता हैसमझ में तब आती है,जब आपसी संवाद होता हैतभी रिश्ते बनते और,बिगड़ भी जाते हैं। भावनाओं में बहकर भी,गलत निर्णय हो जाते हैंतड़प दिलों की धड़कनें,दोनों से ये करवाती हैऔर जल्दी-जल्दी में,वो इसे मोहब्बत कहते हैंपरंतु ये मोहब्बत … Read more

असमानता

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** न हो कभी असमान भावना,नहीं विषमता प्रेम हो।जग में रखना प्रेम भावना,कभी न मन उद्वेग हो॥ ईश्वर के ही जीव चराचर,वह सब कुछ है जानता।ईश्वर की ही कृपा सभी पर,पूजा सबकी मानता॥सदा प्रेम हो दीन-दुखी से,हीन भाव मन में न हो।जग में रखना प्रेम भावना,कभी न मन उद्वेग हो॥ न हो … Read more

पुस्तक

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** पुस्तक प्रकाश है,ख़ुशी का अहसास हैज़िन्दगी का सौन्दर्य व,उल्लसित विश्वास है। जीवन की किरण है,प्रगति की राह हैआवास की खूबसूरती है,झिलमिल रोशनी हैसरस्वती का वास है,बुद्धिमता की जननी है। चिन्तन की धार है,सम्मान की बहार हैएकता सूत्र में,बांधे रखने वालामजबूत सूत्रधार है। पुस्तक विहीन घर नहीं,उजड़ा संसार हैपुस्तक प्रकाश है,सर्वोत्तम उपहार है। घर-घर की … Read more

हिंदी साहित्य संगम’ ने ‘श्रृंग’ की पुण्यतिथि पर किया सम्मान और कवि सम्मेलन

मुरादाबाद(उप्र)। ‘हिंदी साहित्य संगम’ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के निदेशक डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ ने भाग लिया। संस्था के संस्थापक कीर्तिशेष साहित्यकार राजेन्द्र मोहन शर्मा ‘श्रृंग’ की पुण्यतिथि पर इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूनम बंसल को सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से … Read more

पाप-पुण्य

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************ पाप-पुण्य परिभाषा जग में,कर्म फलित मानक होता हैमानदण्ड वे संस्कार मनुज,सदाचार धारक होता है। सत्संगति चलता जीवन पथ,सत्कर्म पुण्य बरसता हैदेश धर्म परमार्थ विरत जग,पाप सीढ़ियाँ नित चढ़ता है। निज पौरुष बल लघुतर जीवन,साफल्य सुयश जब खिलता हैमानवता रक्षार्थ कर्म फल,परमार्थ पुण्य पथ बढ़ता है। जो बाॅंटे मुस्कान खुशी … Read more

गोष्ठी में किया कवियों का सम्मान

वाराणसी(उप्र)। उद्गार साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन की मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश चंद्रभाल सुकुमार,जिला पुस्तकालय के पुस्तकालय अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार रहे और अध्यक्ष साहित्यकार मधुकर मिश्र रहे। सभी ने गोष्ठी में ३ कवियों का सम्मान भी किया।यह गोष्ठी शिविर सभागार(स्याही प्रकाशन परिसर) में की गई। कार्यक्रम में … Read more

मेला

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************** मेला यह संसार है,आते-जाते लोग।चार दिनों की जिंदगी,सहते सभी वियोग॥सहते सभी वियोग,एक दिन सबको जाना।कर ले नेकी काज,यहाँ कुछ नाम कमाना॥कहे ‘विनायक राज’,लगे हैं रेलम-पेला।कठपुतली-सी चाल,जमाना देखे मेला॥