मैं हूँ नारी भारत की

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** मैं हूँ नारी भारत की,मैं नित-नित पूजी जाती हूँ, मैं संस्कार की सूचक हूँ मैं,पुण्य धरा की थाती हूँ। नेह-स्नेह की प्रीत प्यार की,ये अपनी परिपाटी से, त्याग समर्पण सीखा हमने,पुण्य धरा की माटी से। जो जैसा संज्ञान करे,मैं उसको वैसा भाती हूँ, मैं हूँ नारी भारत की,मैं नित-नित पूजी … Read more

भारत का वीर जवान हूँ मैं

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** भारत का वीर जवान हूँ मैं, ना हिंदू ना मुसलमान हूँ मैंl भारतमाता के चरणों की, धूल में पला इंसान हूँ मैंl भारत का वीर जवान हूँ मैं, ना हिंदू ना मुसलमान हूँ मैं। तिरंगे पर जान लुटाते हैं, मिटाते कभी मिट जाते हैंl जन्मभूमि की रक्षा हेतु, करता खुद … Read more

कैसे खेलूं फाग

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ फाग आया,मचले मन उमंग, तन में सागर उमड़े,धड़कन हुई तरंग कैसे खेलूं फाग,जब तुम नहीं हो संग…l सपनों में सजते,अरमानों के रंग, कर लूं बातें प्यार की,तुझे लगा के अंग कैसे खेलूं फाग,जब तुम नहीं हो संग…l रंगों की बारिश में भीगूं,हो के मैं मगन, तेरी राह निहारें,मेरे दोऊ … Read more

क्यों होली बे-रंग

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* होली के नहीं रहे हैं,वह पहले जेसै रंग, हर बार हो रही है यह होली क्यों बेरंग। कुछ स्ट्राइक हुई,पर अभी कई आतंकी, मनाते हैं खूनी होली,मचाते हैं आत॔क। राजनीति के नातों ने भी बदली है कहानी, बुआ होलिका हो ली अब पहलाद के संग। जीएसटी,नोटबंदी खूब हुए हैं ये … Read more

चुनाव

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** चुनाव का अब,माहौल आया, सब मिल नेता,योग्य ही चुनें झूठे वादे कर,न जनता लूटे, कर्तव्य निभाते,करे कार्य पूरे। कागज़,पन्नों में,खिंचे खाका, न लोकहित,न विकास करता सही मायने में जनता को, आज नेता है खूब छलता। नोट देकर वोट है लेता, जनता के विश्वास से खेलता दिये हुए पैसों को अपने, कार्यकाल … Read more

प्यार का सन्देश

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ रेत पर नाम लिखाने से क्या होगा, क्या उसको संदेशा तुम दे पाओगे। जब वो आये यहां पर घूमने को, उसे पहले कोई लहर आ जायेगी। जो तुमने लिखा था संदेशा, उसे लहर बहाकर ले जाएगी। रेत पर नाम लिखाने से क्या होगा…॥ अगर करते हो सही में मोहब्बत तुम, तो … Read more

होली मर्दानी

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान१० वर्ण,१६ मात्रिक, भगण मगण सगण गुरु २११ २२२ ११२ २,दो दो पद समतुकांत हो) रंग सजे सीमा पर सारे। शंख बजाए कष्ट निवारे। संकट आतंकी बन बैठे। कान उन्हीं के वीर उमेंठे। राष्ट्र सनेही भंग चढ़ा लो। शत्रु समूहों को मथ डालो। ओढ़ तिरंगा ले बन शोला। केशरिया होली … Read more

खून की होलियाँ

मनोज कुमार ‘मंजू’ मैनपुरी(उत्तर प्रदेश) **************************************************************************** आज देश महफूज कहाँ है अपने ही गद्दारों से, सीमा पर तो रण कर लेंगे,निपटें कैसे खोटों से। कौन कहे इन हैवानों की करतूतें कब होंगी कम, बच्चा-बच्चा चीख रहा है और सभी की आँख है नम। जुबां-जुबां बोले फिर अब तो इन्कलाब की बोलियाँ, अपने ही अपनों से … Read more

कैसे खेलें होली…

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* होनी थी जो वो तो होली,कैसे खेलें फाग होली, गिरगिट रंग लेकर सभी दल खेल रहे हैं आज होली। रक्त रंजित वीर अरि से खेल रहे हैं रण में होली, आरोपों का गुलाल ले आई नेताओं की देखो टोली॥ चोर-चोर कह शोर मचावे,भोली जनता को रिझावे, भ्रष्टाचार की गागर लेकर … Read more

उन्मुक्त कविताओं का संसार है ‘मुक्त तरंगिणी’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** पुस्तक समीक्षा………………….. प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संग्रह की श्रृंखला के अंतर्गत पूरन भंडारी सहारनपुरी द्वारा संकलित पुस्तक मुक्त तरंगिणी एक ऐसा काव्य संग्रह है,जिसमें रचनाकारों की भावनाओं का बिखराव उन्मुक्त रूप से हुआ है। जिस प्रकार जल की उन्मुक्तता सागर-सा विस्तार देती है,मन की उन्मुक्तता सपनों-सा आकाश देती … Read more