स्त्री

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** मैं स्त्री हूँ, इसलिए हर सुख-दु:ख सहती हूँ भगवान ने मुझे सहनशील बनाया है, इसलिए सबकी डांट सुनती हूँ क्योंकि,मैं स्त्री हूँ। मुझसे सारी अपेक्षाएं रखी जाती है, जिसे पूरा करना मेरा फर्ज है अगर कोई गलती कर दूं तो, मुझे उलाहना मिलता है क्योंकि,मैं स्त्री हूँ। कोई तकलीफ घर पर … Read more

हाय हाय रे गर्मी…

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** हाय हाय रे गर्मी, हाय हाय रे गर्मी, जल बिन जन-जीवन तड़पे… मानसून ने ठानी बेहद बेशर्मी, हाय हाय रे गर्मी,हाय हाय रे गर्मी। वरुण देव नाराज़ चल रहे, बादल बिन जल के मचल रहे… मौसम में न आती नरमी, हाय हाय रे गर्मी,हाय हाय रे गर्मी। यह माह जेठ … Read more

मालूम नहीं,दौड़े जा रहे हैं लोग

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* (रचनाशिल्प:२१२ १२१ २१२ १२१) कुत्ते की क़दर,आदमी बेक़दर देखा, सबकी ख़बर,ख़ुद को बेख़बर देखा। बेवफ़ा हवाओं ने अपना रुख़ बदला, मौसम-ए-बहार में सूखा शज़र देखा। मालूम नहीं कहाँ,दौड़े जा रहे हैं लोग, बगैर मंजिल का हमने ये सफ़र देखा। तेरे पत्थर से दिल में,मोहब्बत भर दी, अपनी दुआओं का हमने … Read more

…तो समझ लेना

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* जब मेरी नज़्में खामोश हो जाएं, जब पुकारना बंद कर दें तुम्हें तो समझ लेना, सो गई हूँ तनहाइयां ओढ़कर, तुम्हारी परछाइयां ओढ़कर…। जब कभी अचानक ही मन बहुत बेचैन हो जाए, तो समझ लेना… कि चली गई हूँ,अपनी बेचैनियां छोड़ कर…। कभी बात-बात पर जो नयन छलक जाएं, तो समझ … Read more

`एक देश-एक चुनाव`…एक तीर से कई निशाने

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** द्रोणाचार्य ने पेड़ पर बैठे पक्षी को निशाना लगाने को बोला,सबने निशाने ताने,पर अर्जुन ने पक्षी की आँख को ही निशाना साधा और वह सफल हुआ। कभी-कभी शांत तालाब पर एक पत्थर फेंको,तो उसकी तरंगें पूरे तालाब में दिखाई देकर विलीन हो जाती हैं। राजा के मन की बात में उसका … Read more

स्वच्छ भारत,स्वस्थ भारत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** निर्मल मानसपटल हो,स्वच्छ शील सुविचार। निर्मलता हो कर्म में,स्वस्थ राष्ट्र आधारll स्वच्छ रखें रनिवास को,स्वच्छ रखो परिवेश। स्वच्छ रखें भू संपदा,है बापू संदेशll अपने घर की गंदगी,फेंकें राह न नीर। नियत जगह निस्तार के,रखें स्वस्थ शरीरll रखें शूचिता ध्यान सब,मत केवल उपदेश। स्वच्छ हेतु है स्वस्थता,हो निरोग जन … Read more

आचार्य डॉ.लोकेश ‘विश्व शांति पद्म’ से सम्मानित

नई दिल्ली। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक,प्रसिद्ध लेखक व प्रख्यात जैन आचार्य डॉ.लोकेश जी को संयुक्त राष्ट्रसंघ के ऐतिहासिक चर्च में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्धार्मिक सम्मेलन में ‘विश्व शान्ति पद्म अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वैश्विक सांस्कृतिक व मानवीय मूल्यों के उत्थान तथा विश्व शांति व सदभावना के संवर्धन-संरक्षण … Read more

पुष्प

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हे पुष्प! सौंदर्य तुम्हारा है अतुलित। सुंदरता के संग सुगंध है मधुरितll पंखुड़ियों के रंग बहुत सुंदर होते। लाल गुलाबी श्वेत वर्ण के दल होतेll काँटों से मिलकर सौंदर्य बिखेर रहे। मित्र भाव से पौधे को सहेज रहेll काँटों में ले जन्म और पालन कंटक। फिर खिलकर सौंदर्य-गंध फैलाये जगll … Read more

बेवक्त में सहारा नहीं मिलता

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** हर गली में शिवाला नहीं मिलता। रौब वाला दुशाला नहीं मिलता। खोजने से उजाला नहीं मिलता। भूख मे हो निवाला नहीं मिलता। यूँ ठिकाने बहुत मिल गये होंगे, बेवक्त में सहारा नहीं मिलता। भीड़ के बीच हों हम हजारों के, डूबते को किनारा नहीं मिलता। दम भरें हम सभी हैं … Read more

दूसरी माँ की दूसरी बेटी

रितिका सेंगर  इंदौर (मध्यप्रदेश) ****************************************************** आज माँ का श्राद्ध है,इसलिए मीनू अपने मायके आई हुई है,और सुमन ,मीनू की भाभी,पण्डित जी को श्राद्ध सामग्री देते जा रही है। सामग्री लेते हुए पण्डित जी ने कहा,-“भोजन में सब माँ की पसंद की चीजें ही बनाई है नl” । रुंधे मन से मीनू बोली,-“पण्डित जी,माँ ने कभी … Read more