तीसरी भाषा के रुप में हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषा का विकल्प दिया जाए

हरिसिंह पाल ******************************************************* शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल……….. हम त्रिभाषा सूत्र के नाम पर हिंदी भाषा-भाषी लोग संस्कृत लेकर इतिश्री कर लेते हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की ओर मुँह उठाकर भी नहीं देखते। यह दर्द सिर्फ तमिलनाडु का ही नहीं है,आप कर्नाटक ले लीजिए या मिजोरम,सबमें यही रोष है। बस … Read more

मेरी ये पीड़ा समझोगे कभी!

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* धरती कहे पुकार के… जरा देख मुझे संतान मेरी, अपने हृदय के प्यार से अपने चक्षु की नमी से, कब समझोगे मेरा प्रेम जो सदा है समर्पित, तुम्हारे लिए सदियों से। और तुम लूटते हो मेरा सौन्दर्य, मेरी मुस्कान चीर देते हो मुझे… मेरी ये पीड़ा, जो समझोगे … Read more

एक दिन धरा पर..

गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’ भंगवा(उत्तरप्रदेश) **************************************************************** ये चुभती धूप, ये चिलचिलाती गर्मी वस्तुतः ऋतु परिवर्तन के कारण ही है, परंतु इसकी अति, व असामयिक गति के कारक हम स्वयं हैं, प्रकृति से चल रही छेड़छाड़, अत्यधिक सुख भोग की मानव की चाह, मानव कृत प्रदूषण की भरमार, कटते वन, बढ़ती पालीथिन कारखानों जनित विषाक्त कचरा, वाहनों … Read more

सुख की खाई को है पाटा

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* आज समस्या हुई अनेक, कैसे हो अब निराकरण आओ मिल-जुलकर करें, स्वच्छ चहुँ दिशि पर्यावरण। निर्मलता से वृक्षों को काटा, सुख की खाई को है पाटा दूभर हो अब जीव भरण, जब शुष्क हुआ पर्यावरण। हरियाली का ह्रास हुआ, वृक्षों का विनाश हुआ शुद्ध वायु के अभाव में, दूषित सबकी … Read more

राज्यपाल को पुस्तकें भेंट

भोपाल(मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल से भोपाल निवासी साहित्यकार डॉ.अरविंद जैन और नितिन जैन,प्रदीप जैन एवं डॉ.विनीता द्वारा भेंट की गई। लोकप्रिय मंच हिंदीभाषाडॉट कॉम(www.hindibhashaa.com)के वरिष्ठ लेखक डॉ.जैन ने स्वयं लिखित पुस्तकें-भक्ति की शक्ति,आनंद -कही अनकही,चार इमली,चौपाल,चतुर्भुज एवं चेतना का चातक राज्यपाल को इस दौरान भेंट की। राज्यपाल ने डॉ.अरविंद जैन द्वारा लिखित … Read more

सूरत

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** सूरत में भावों का दर्शन होता है, छिपे हुए उदगार प्रदर्शन होता है। कितना ही मन अपने भाव छिपाता है, पर सूरत पर तो सत्य प्रदर्शन होता है। हर्ष,शोक,दु:ख,चिंता जिससे पीड़ित हों, सूरत पर हर भाव का दर्शन होता है। पर कुछ ऐसे कर्म छुपे भी होते हैं, सूरत पर … Read more

हिंदी मत लादिए लेकिन…अंग्रेजी हटा दें

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** त्रिभाषा-सूत्र के विवाद पर तीन-तीन मंत्रियों को सफाई देनी पड़ी है। उन्होंने कहा है कि यह तो शिक्षा समिति की रपट भर है। यह सरकार की नीति नहीं है। अभी इस पर सांगोपांग विचार होगा,तब यह लागू होगी। क्यों कहना पड़ा,उन्हें ऐसा ? इसलिए कि मोदी सरकार पर यदि हिंदी … Read more

बल-प्रखर महाराणा प्रताप

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** राणा प्रताप प्रखर,प्रबल है प्रभाव, अणु-अणु में मुखर अनंत,अडिग अटल स्वभाव। राजपूत की नाक वे,आन-बान की शान, बने प्रताप सदा ही,सबल सख्त इंसान। मुगलों को धूल चटाई,अकबर नीयत भाँप, घनी मूँछों वाले ने,छोड़ी अचूक छाप। बलशाली भुजाओं से,सब शत्रु हुए अनाथ, महाराज मेवाड़ के,सिर्फ समर्थ सनाथ। कूट-कूट हुई पूरित,वीरता दृढ़ प्रण, … Read more

समय रहते सम्भल जाओ

जसवंतलाल खटीक राजसमन्द(राजस्थान) ************************************************************* मुझको लगते हैं प्यारे, वन्यजीव देखो हमारे। अब इनको बचाना है, बचेंगे तभी वन हमारे॥ क्यों लगाते हो आग वन में, क्यों पहुँचाते हो नुकसान। पर्यावरण सरंक्षण के लिए, बनाओ इनको भी अभियान॥ लुप्त हो रही है प्रजातियां, सब अपने मोह और लालच में। समय रहते सम्भल जाओ, एक जीव नहीं … Read more

अंधेरी है रात..

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** अंधेरी है रात हम भटक गए हैं बाट, छूट गया है साथ बहुत बड़ी हो गई रात। कौशिक बोल रही है बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं चारों तरफ शोर मचा है। भयानक-सी है रात कैसी हो गई बात, पग-पग कठिन है बाट घनघोर लग रही है रात। टिम-टिमटिमाते … Read more