बरसात

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* बरसात प्रकृति का हसीन एहसास, जैसे दुनिया के खुशी के पल हों पास। पायल की झनकार-सा रोचक-सा संगीत, जैसे इस सुहाने मौसम में मिला हो मनमीत। रंग-बिरंगी फिजाओं से घिरा हो चमन, अपनी अठखेलियों से मनमुग्ध है गगन। रिमझिम बूदों से धरती ने दुल्हन-सा रूप सजाया, जैसे हर ओर खुशियों … Read more

मशहूर हूँ खुद की लाचारी से..

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* मैं कृषि हूँ,कृषि प्रधान देश का देश की रीढ़ की हड्डी हूँ, देश की रक्त धाराओं में बहता हुआ प्रसिद्ध हूँ। देखो ना… मशहूर हूँ मैं दुनिया में खुद की लाचारी से, भुखमरी,अकाल,अशिक्षा की बीमारी से। माना तृप्त करता हूँ मैं सबको, फिर क्यूँ खुद ही भूखा रह जाता हूँ… … Read more

बिछड़े हुए लोगों से

आर.पी. तिवारी स्वदेश बांदा (उत्तर प्रदेश) ********************************************************************** बिछड़े हुए लोगों से, गुरेजा न हुआ कर। बीते हुए लम्हों को, कुछ याद किया करll जो भूल गए तुझको, आगाजे-सफर में। भूल से ही उनसे, मिलने की दुआ करll बिछड़े हुए लोगों से, गुरेजा न हुआ कर… ऐ दोस्त तुझे दुश्मन, की पहचान कहां है। महफिले-यारा में, … Read more

बाद मुद्दत के….

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** बाद मुद्दत के,उन्होंने मेरा हाल पूछा है क्या छुपा मन में,जो डर-डर के पूछा है, मैंने भी पूछ लिया,क्यों याद किया मुझे कोई बहाना भी,तो उन्हें नहीं सूझा है। आह तो निकलेगी ही चाहे वो मुस्कुराएं सालों से तो यूँ ही कलेजा नहीं फूंका है, इशारे में याद दिला दी,राज … Read more

नेपथ्य से…

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** जीवन नहीं सजा करता है, बिना कँटीले-बीहड़ पथ से राग-अनुराग यूँ ही नहीं छिड़ा करता, बगैर हौंसले और नेक इरादे नेपथ्य से। जनम मिला खुशी पाई औरों ने, खुद से लड़ना है कही बात गैरों ने हाँ! हाँ! खुशियाँ यूँ ही मुफ़्त नहीं मिलती, बगैर खुद जिंदादिली शिकस्त खाने से। जीवन … Read more

बड़ी अदभुत प्रतिभा रहे अरुण

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** जीएसटी और नोटबन्दी,लिया था फैसला मुश्किल, कुशल नेता प्रखर वक्ता,सभी के संग रहे घुल-मिल। बड़े ही प्रिय अरुण जेटली,अटल वाजपेयी के खास, गये वो छोड़कर सबको,वहाँ सुषमा-अटल के पास। बड़ी अदभुत प्रतिभा वो,सदा लोकप्रिय अरुण जी थे, सियासी धुर विरोधी में,सभी के प्रिय अरुण जी थे। कहाँ हारे कभी … Read more

क्या से क्या हो गए लोग..

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) *************************************************************** बड़े मतलबी और मगरुर हो गए हैं लोग, दौलत के नशे में चूर हो गए हैं लोग। साथ मनाते थे जो हर तीज और त्यौहार, आज मन में मैल रख नीम और बबूल हो गए हैं लोग। भाई,भाई को पूछता नहीं बेटा बाप से डरता नहीं, मन को बंजर … Read more

बेटी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** जीवन का आधार है बेटी, सपनों का संसार है बेटी। परियों का रुप है बेटी, चिड़ियों की चहचहाहट है बेटी। सूरज की गरमाहट है बेटी, चाँद की शीतलता है बेटी। घर की शान है बेटी, त्यौहारों की जान है बेटी। माँ-पिता का अभिमान है बेटी, ससुराल का मान है बेटी। हर … Read more

दुनिया की अजीब कहानी

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** यारों इस दुनिया की अजीब कहानी, कोई हँसता सदा,किसी आंँख पानी। दाने-दाने के लिए कोई लड़ रहा, भ्रष्ट-तंत्र,भारी जीवन पर पड़ रहा। बिलखती झोपड़ी,हंँसती महल रानी, यारों इस दुनिया की अजीब कहानी। कहीं फसाद,धर्म-अधर्म की लड़ाई, एक मांँ,पर रक्त दुश्मन बने भाई-भाई। तेरा खुदा,मेरा ईश्वर,कैसी है नादानी ? यारों … Read more

आखिर क्यों जरूरी है हमें चौकीदार बनना …?

दिनेश पाठक  इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* अर्जुन का गांडीव बनूँ या,खुद गीता का सार बनूँ मैं ? कलम उठाकर वार करूं या,शब्द-शब्द अँगार बनूँ मैं ? मातृभूमि के चरणों की रज,ममता की रसधार बनूँ मैं ? हार-जीत का बनूँ कभी या ,खुशियों का त्यौहार बनूँ मैं ? कवि हूँ तो क्या कविताओं का,खुद अंधा रुजगार बनूँ मैं … Read more