कुछ तो कमी रहेगी

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ हर नामी में कुछ कमी तो रहेगी, आँखें थोड़ी-सी शर्माती रहेंगीl जिंदगी को आप कितना भी संवारिये, बिना हमारे कोई-न-कोई कमी तो रहेगीll खाली हाथ आप आये थे संसार में हज़ूर, खाली हाथ आप जायेंगे संसार से जरूरl संसार में रहकर,बातचीत न करके आप, कितनी चिल्लर संसार से बचाएंगे हजूरll कभी … Read more

पृथ्वी के मुख पर कालिख़

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जब मैं जन्मी, पूरी की पूरी पृथ्वी मेरे इर्द-गिर्द थी, पहाडों से फूटते झरने सरसराते पेड़ों से लिपटी लताएँ, खिलखिलाते अनगिनत फूल घनघोर बरसती हुई बारिश और हवा ने, मेरी नन्हीं-नन्हीं हथेलियों को चूम लियाl बचपन की हर सुबह, मैदानों में होती थी … Read more

हरी-भरी हो धरा

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… लो संकल्प- हरी-भरी हो धरा, नहीं विकल्प। एक ही नारा- प्रदूषण मुक्त हो, देश हमारा। बीमार मन- उगे चारों तरफ़, कांक्रीट वन। कटते वन- बंजर धरती से, दुःखी है मन। एक ही दवा- पेड़-पौधों से मिले, शीतल हवा। पृथ्वी बचाओ- स्वस्थ और सुंदर, … Read more

धरा

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरा करती श्रृंगार, देखो वर्षा की फुहार हरियाली हर ओर, धरती हरियाई। छाई है देखो बहार, नाचता है मन मोर हो गई सुहानी भोर, धरा खिलखिलाई। कोयल की मीठी तान, पपीहे की देखो शान कामदेव छोड़े बान, रति भी मुस्कुराई। घनघोर घटा छाई, मोरनी नृत्य … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* ‘आत्मजा’  खंडकाव्य से,अध्याय-८ … बोली माँ पति से समझा कर, अब है समय नहीं सोने का खोजो वर सुयोग्य बेटी को, नहीं एक भी क्षण खोने का। हुई सयानी बेटी अपनी, लगी समझने वह सब बातें भावी के प्रति ही आकर्षण, बढ़ता ज्यों बढ़ती दिन-रातें। रहती वह खोयी-खोयी-सी, जैसे अपने को … Read more

श्रृंगार धरा का

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… आओ करें श्रृंगार धरा का, नूतन वस्त्राभूषणों से हरीतिमा की चुनर लाओ, शर्माई धरती को सजाओl पुष्पगुच्छ के कर्णफूल हों, पकी फ़सल हो स्वर्णमेखला कर सोलह श्रृंगार वधू का, प्रियतम के समीप ले जाओl कलकल ध्वनि से वह हास करे, खग कलरव से नित नृत्य … Read more

हमारी पृथ्वी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… पृथ्वी है हमारी सब ग्रहों से न्यारी, इसमें ही ईश्वर जड़े हैं जीवों की क्यारी सब ग्रहों में इसका बड़ा मान है, इस पर हम सबका अभिमान है। है यह ममतामयी माता-सी महान, चोट खाकर भी हमें देती खाद्यान्न सीने को चीर देती … Read more

हुंकार

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* अपने श्रम को बेचने वाले श्रमिकों, एक हो जाओ जैसे- एक हो जाती हैं आग की लपटें, अब नहीं है तुम्हारे पास, खोने के लिए कुछ भी। तुम्हारा जीवन, जकड़ा है आर्थिक विकास के चरित्र से, तार-तार होकर जीवन चला रहे हो, फिर भी मरते हैं क्यों तुम्हारे बच्चे भूख से … Read more

न आँचल मैला होगा,रखेंगे स्वच्छ

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… चिंटू ने भी मनाया मिंटू ने भी मनाया, सबने पटाखे छोड़े खूब धुआं उड़ाया। मोमबत्ती भी जलाई और फिर बुझाई, और सबने खुशी से खाई खूब मिठाई। कब किसको बूढ़ी माँ का ध्यान आया, कब किसी ने उसका जन्मदिन मनाया। युगों से पालन में … Read more

माँ धरती

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… प्रकृति को छेड़ के क्यों कर रहा नाश, दुनिया का ऐसे में हो जाएगा विनाश। भौतिक साधनों से हो गया लाचार, पर्यावरण को कर दिया दूषित और बेकार। ना कर इंसा ऐसी नादानी, जीवन दे के पड़ेगी कीमत चुकानी। ना दिखा ऐसे विकास के सपने, … Read more