परिंदों का दर्द
डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’ नागपुर(महाराष्ट्र) ************************************************************************* दो चिड़िया एक-दूसरे को अपनी पीड़ा का बखान कर रहीं थीं। एक बोली, -“बहन इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है। एक बूँद पानी भी नहीं मिलता,जिससे हमारी प्यास,कुछ तो मिट सके। इंसान अपने नलों की टोंटी भी मजबूती से लगाते हैं। उससे भी पानी का रिसाव नहीं होता। … Read more