ग़ज़ल को पढ़ने-सुनने के साथ बहर का अभ्यास अत्यंत आवश्यक
पटना (बिहार)। ग़ज़ल सीखने के लिए मेहनत करने के लिए भी तैयार रहना ज़रूरी है। ग़ज़ल एक अत्यंत अनुशासित विधा है। मेहनत माँगती है और जो इसको स्वीकार कर लेता है, ग़ज़ल उसे भी स्वीकार कर लेती है। कहने से पहले ग़ज़ल को पढ़ने और सुनने के साथ साथ रदीफ़, क़ाफ़िया और बहर का अभ्यास … Read more