बलात्कारी भी हो सकता है मानव बम

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** मानव बम की खोज,किए मानव के दुश्मन, हत्या करते रोज,लूटकर मानवता धन। निर्दोषों को मार,स्वयं भी हैं मर जाते, मानवता का अन्त,खुदा के नाम लिखाते॥ बलात्कार-दुष्कर्म,उसी साज़िश का हिस्सा, घटना को लो जोड़,नहीं साधारण किस्सा। सोची-समझी चाल,चलें अब ये नरभक्षी, उनको है यह ज्ञात,कोर्ट उनका है रक्षी॥ रपट और कानून,सबल … Read more

हाँ हूँ एक बुरी माँ

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ कैसे सिखाऊं अपनी बेटी को ‘बर्दाश्त’ करना…! एक ऐसे परिवार को जो उसका ‘सम्मान’ न कर सके…, कैसे सिखाऊं कि पति की ठोकर खाना सौभाग्य की बात है…! मैंने तो सिखाया है ईंट का जवाब पत्थर से दो…, अगर कोई कहे तो कहता रहे… हाँ हूँ मैं एक बुरी … Read more

ये तपती धरती..

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** गर्मी का वार हो रहा है, पारा पचास से भी पार हो रहा हैl लू के थपेड़े पड़ रहे, बढ़ रही गर्मी तप रही धरती भानु की आग से जल रही धरतीl पेड़-पौधों की कमी खल रही, तपती धरती से पेड़-पौधे भी जल रहेl बदलते मौसम की ये मार पड़ रही, … Read more

इंसानियत है ही कहां ?

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** इंसानियत है ही कहां,जो शर्मसार हो, सचाई लुप्त होगी बिका कलमकार हो। आशा क्या करोगे लोकतंत्र से तुम सारे, जब चारों स्तम्भों में व्याप्त भ्रष्टाचार हो। घुटने सत्य ही टेक देगा एक दिन जहां, सत्य मेव ज्यते जैसी बेबस सरकार हो। यथार्थ मेरा झूठी गढ़ी कहानी बन … Read more

काश ऐसा हो!

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* काश कालिमा मिट जाये,रवि-सा उजियारा छा जाये, भारत फिर आर्यावर्त बने,पथ सारे जग को दिखलाएl यों तो यह अपना देश कभी,धार्मिक तत्वों का वेत्ता था, दुष्कृत्यों को षडयंत्रों को,सत्कृत्यों से धो देता थाl पर इसमें पाप प्रविष्ट हुआ,वह ध्यान,धर्म, धीरज न रहा,दिन-रात वही,धन-धाम वही,पर सत्य,शील,संयम न रहाl इसलिए जलाओ ज्ञान दीप,अज्ञान … Read more

वह कौन है…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** हवाओं की रवानगी थी, मेरी रफ़्तार भी कुछ तेज थी मौसम खराब का अंदेशा था, थोड़ा मन डरा हुआ था। हर कदम पर कोई पीछा कर रहा था, जैसे कदम रुकते वो भी थम-सा जाता था, कई बार ऐसा महसूस हुआ फिर मैं बोली कौन हो तुम ? सामने क्यो नहीं … Read more

ब़ुत बनाकर

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचना शिल्प:२१२२ २१२२ २१२२) ब़ुत बनाकर रोज ही तुम तोड़ते हो, कर चुके जिसको दफ़न क्यों कोड़ते हो। अब बता दो कौन सी बाक़ी कसक है, आज फिर क्यों सर्द साँसें छोड़ते हो। ख़्वाब सबने तो सुहाने ही दिखाए, बन गई नासूर यादें फोड़ते हो। एक मन मंदिर बना लो उस … Read more

गाँव का जीवन

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गाँवों का जीवन भला,होता सुखमय यार। घर-घर मीठे बोल है,पावन शुद्ध विचार॥ नहीं किसी से दुश्मनी,रहते मिल-जुल लोग। शुद्ध हवा का द्वार है, होते सभी निरोग॥ सुन्दर-सुन्दर घर यहाँ,लिपे-पुते दीवार। स्वर्ग यहाँ सिमटे मिले,छोटा-सा संसार॥ बाग-बगीचा वाटिका,वन-उपवन गुलजार। कोयल कुहके डाल हैं,मैना की झंकार॥ अमराई की छाँव में,मिलता … Read more

अंतरिक्ष स्वप्न

श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ अजमेर(राजस्थान) **************************************************** यह कलियुग है, और कलयुग भी। नित नूतन यंत्रों का आविष्कार, पल-पल होता परिष्कार। इनके बल पर ही देखे जाते, अंतरिक्ष में उड़ने के स्वप्न प्राप्त होते नित नूतन अनुभव। खोजे जाते सृष्टि के सूक्ष्म रहस्य, ग्रह,उपग्रहों के भिन्न-भिन्न घनत्व। प्राप्त सूचनाएं संभाव्य, मानव जीवन का निर्वाह नहीं रुकती … Read more

पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** प्रकृति को सहेजने को अब सब मिल के तैयार हों, विनाश ना हो प्रकृति का,यह प्रयास बार-बार होंl जागो सभी बचाओ अब इस सृष्टि के आधार को, पेड़ लगाओ और बचाओ जीवन और संसार कोl पेड़ कट रहे हैं अंधाधुंध अब तेजी से चहुंओर, जंगल करके साफ फैक्ट्रियां लगाने में … Read more