मुमकिन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** वक्त के साथ ही चलते रहना। कदम-कदम कर बढ़ते रहना। लक्ष्य अगर पाना है मुमकिन- तो जज्बा से बढ़ते रहनाll हिम्मत रख कर बढ़ने वाले। चट्टानों पर चढ़ने वाले। कभी न पथ से हटते हैं वह- मुमकिन राह बनाने वालेll श्रम से पीछे हटो कभी ना। कर्म विमुख तुम कभी … Read more

दौलत और मुहब्बत

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** किसी का दिल नहीं तौलो,कभी धन और दौलत में, नहीं औकात सिक्कों में…खरीदे दिल तिजारत में। नहीं बाज़ार में मिलता,…नहीं दिल खेत में उगता- समर्पण बीज जो बोता,…वही पाता मुहब्बत में॥ तराजू में नहीं तौलो,…किसी मासूम से दिल को, बड़े निश्छल बड़े कोमल,बड़े माशूक़ से दिल को। जरा-सी चोट … Read more

शिक्षक की महिमा..

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** वे ऐसा काम करते हैं सभी गुणगान करते हैं, हमें अमरित पिला कर खुद जो अमरित पान करते हैं, कि उनके पाँव अक्सर शब्द मेरे चूमते रहते- बहुत ही पूज्य गुरुवर हैं कि विद्या दान करते हैं। अशिक्षा का जो होता है वो घेरा चीर देते हैं, वे तेरा … Read more

कृष्ण

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो सुंदर सलोना प्यारा श्याम है। ब्रज में रहता उसका ही धाम है। वो गोकुल की गलियां भी उसकी है, मोहन,राधे कृष्ण उसका ही नाम है। मोर मुकुट से सजा मुखड़ा और प्यारा। गोपियों के प्रेम में जग उसका सारा। आँखों में काजल सांवला रंग उसका, कान्हा की सुंदरता से जग … Read more

माँ

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* माँ तेरा प्यार सरसता देता। जो दु:ख को नीरस कर देता। आते ही स्मरण माँ तुम्हारा- जग के दारुण दु:ख हर लेता। कैसे तेरा प्यार भुलाऊँ। कैसे तेरा ऋण चुकाऊँ। तेरे चरणों में है माँ- मैं अपना शीश झुकाऊँ। माँ मुझको आशीष अमर दो। त्रुटि मेरी क्षमा अब कर दो। … Read more

गुलशन

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** महका-महका वो ये गुलशन है। जहाँ फूल खिल जायें वो मन है। जहाँ फूल खिलते खुशबू आती, मेरा दिल का आंगन उपवन है। गंध की फिजाओं में बहार है। प्यार की इस गुलशन में धार है। इस प्रेम की वर्षा से महकता, जीवन सबका आज हर बार है। रिश्तों का प्यारा … Read more

हम सब योग अपनाएं

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष……………. आओ भारत की संस्कृति का गौरव गान करें। ऋषि-मुनियों की इस परम्परा का बखान करें। योग को पूरी दुनिया ने अब अपना ही लिया, आज योग को मिलकर सारा हिन्दुस्तान करे। स्वस्थ बनने के लिए हम सब योग अपनाएं। योग से रोग मिटा कर खुद को स्वस्थ … Read more

शरण न जाने कहां पाए तन…

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जीवन का यह कटु परिवर्तन, विवशता कर रही नग्न नर्तन। सब-कुछ ना चाह कर भी त्यागा, और त्यागे सब घर के बर्तनl शरण न जाने कहां पाए तन, अनिश्चित-सा रहता व्याकुल मन। सब-कुछ होने पर भी उर तरसे, छोड़ दिया सब जब अपना धन। शरणार्थी हो … Read more

संस्कार के बीज

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** दर्पण कितने बदले तुमने,चेहरे को तुम बदल न पाए। नेेह-स्नेह के भाव कहो क्यूँ,अब तक तुममें मचल न पाए। चाँद-सा चेहरा भोली सूरत,दर्शन में बड़े सुहाने हो। इस माटी में संस्कार के,बीज कहो क्यूँ पल न पाए। परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, … Read more

आशिक जमाना कह रहा है….

पारस गुप्ता  ‘शायर दिल से’  चन्दौसी(उत्तर प्रदेश) ********************************************************* दिल्लगी के,दौर में अब,कौन नफरत,कर रहा है… इश्क़ पढ़कर,इश्क़ लिखकर,इश्क़ में जी,मर रहा है… लुट रहा वो,मिट रहा इक,बेवफा के,प्यार में क्यूँ… आजकल पागल को आशिक ये ज़माना कह रहा है…। परिचय-पारस वार्ष्णेय का साहित्यिक उपनाम-पारस गुप्ता ‘शायर दिल से’ है। १९९४ में ६ दिसम्बर को चन्दौसी … Read more