उन गलियों तक…
पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** जिंदगी का सफर गलियों के बिना अधूरा-सा रहता है, हमारे बचपन के दिनों से लेकर आज इस उम्र तक उन गलियों तक… कहीं भी जाएं,कहीं रहे इक सपना पलता है, वापस आकर मन की गलियों में ठहरने लगता है, ये हमारे अकेलेपन के अपने साथी हैं, जो मन को बहुत सुकून … Read more