साहस…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ तू जो चाहे, पर्वत पहाड़ों को फोड़ दे, हवा के बदलते रूख को भी मोड़ दे, अगर साहस से तू काम ले…। तू जो चाहे, सागर की असीम गहराईयों को, भी आज छू ले अंतरिक्ष की अनन्त ऊँचाईयों को, भी आज छू ले अगर साहस से, तू काम … Read more

दर्द

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** बात बहुत छोटी रहती है पर दिल समझ ना पाए, उनकी बातों से मेरी आज आँखों में आँसू उतर आए, जैसे शाम को भूला कोई… घर भटकते पास आ जाये। कैसा रिश्ता होता है ये क्यूँ भरोसा करके उन पर, चोट बहुत वो पहुंचाता है कितना समय निकल गया, फिर वही … Read more

बादलों का घर

कृणाल प्रियंकर अहमदाबाद(गुजरात) ****************************************************** फिर आज़ जा पहुँचा बादलों के घर में, मौसम बारिश का था मंज़र भी सुहाना थाl वो भी आ गये थे करने स्वागत मेरा, थोड़े काले,थोड़े भूरे थोड़े उजले दूध जैसे, एक अलग ही दुनिया है बादलों कीl मदमस्त रहते हैं दौड़ते हैं, कभी रुकते कर कोलाहल, फिर हैं झुकते इक-दूजे … Read more

झील,पेड़,और नदियाँ कहाँ हैं मेरी ?

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** तू बुलाती है मुझे बार-बार क्यों री धरा, तेरे ही नुमाईन्दों ने ध्यान मेरा कहाँ धरा। मैंने तेरे पास छोड़ अपनी बेटियों को रखा, तेरे ही नुमाईन्दों ने उनका क्यूँ विनाश किया। अब मैं आऊं भी वहाँ तो बता तू किसके लिये ? मेरे आने का जरिया तो … Read more

ताने कस रहा है वो…

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** मुझ पर ताने कस रहा है वो, मेरे जख्मों पर हँस रहा है वो। गुरुर की नाव में सवार होकर चला था, अब बीच मझधार में आकर फँस रहा है वो। बड़ा होकर बदल जायेगा,ये भरम था मेरा, आसमां में उड़ने की जगह जमीं में धंस रहा है वो। आँखों … Read more

कबीरा

पंकज त्रिवेदी सुरेन्द्रनगर(गुजरात) *************************************************************************** हरि नाम के वस्तर बुनते मन हरि हरि कबीरा, ताने-बाने बुनते-बुनते ऊठ रही है तान कबीरा। आधे कच्चे,आधे पक्के सूत के दिन ये चार कबीरा, नीले पीले हरे गुलाबी कुछ दिन है ये लाल कबीरा। बुनता कपड़ा ऐसे फैला जैसे चारों वेद कबीरा, इच्छाओं के तार टूटते बाँधे कसकर वो ही … Read more

बचपन की यादें

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** एक साथ खेले हैं हमने पलकों में उन्हें छुपाए, सारी-सारी रात जागकर दिल की बात बताएं। हाँ बचपन ऐसे बीत गया शबनम हमसे रूठ गई, कसमें-वादे टूट गए सपने सारे लूट गए। चले गए वो छोड़ के हमसे नाता तोड़ के, यहीं बातें बोल के फिर मिलेंगे सब छोड़ के। उन्हीं … Read more

बरसती फुहारें

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* सखी रे रिमझिम बरसती फुहारें, कान्हा आए,चल भीगें हम सारेl भली लगती बरसती फुहारें, तनमन में उल्लास जगाती, धरती की तृष्णा बुझाती, पत्ते-पत्ते पे फिसलती बूंदें डालियाँ झूम-झूम हैं गातीl सखी रे रिमझिम बरसती फुहारें, कान्हा आए,चल भीगें हम सारेl राधा रानी मुस्काती है इठलाती, छम-छम पायलियाँ हैं … Read more

पैसे और प्रमाण-पत्र

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* पैसे में बनते हैं चरित्र प्रमाण-पत्र, अधिकारी आपके चरित्र के बारे में जाँच नहीं करते उनके यहाँ चरित्र का एक निश्चित दाम होता हैl दस रुपये सामान्य चरित्र, बीस रुपये अच्छा चरित्र सौ रुपये उत्तम चरित्र सामान्य चरित्र के लिए, कुछ रिकार्ड भले ही देखें जाते हों पर उत्तम चरित्र … Read more

कितने हो निर्लज्ज बताओ…

प्रियांशु तिवारी ‘सागर’ कटनी(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** जब बंटवारा हुआ देश का,पूरा भारत रोया था, कुछ लोगों की नाकामी पर रात-रात न सोया थाl दिन का चैन-रात की नींदें छीन विदेशी चले गये, और हमारे भारत के नेता जी सारे छले गयेl चले गये अंग्रेज़ी लेकिन अपना भारत तोड़ गये, जाते-जाते इस भारत में धर्मवाद वो छोड़ … Read more