महँगाई डायन

अनंत ज्ञान गिरिडीह (झारखंड) ********************************************************************** महँगाई डायन बिग बाज़ार में, खरीददारी कर रही है हज़ार मेंl क्या ठाट-बाट से बाज़ार आई है, देखो बड़ा-सा पर्स भी साथ लाई हैl लेकर आई है सूची लंबी-चौड़ी, देखते बन रही है उसकी भागा-दौड़ीl कभी इस तल्ले से उस तल्ले पर, कभी कपड़ों पर,तो कभी श्रृंगार परl जी भर … Read more

तो फिर क्यों आ रहे हो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो, बताओ,क्या जताने आ रहे हो ? तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, तो फिर क्यों अब मुझे वापिस मनाने आ रहे होl क्यों पिंजरे में रखा था तुमने अब तक कैद करके, क्यों पिंजरे से मुझे अब तुम छुड़ाने आ रहे होl गिराया … Read more

दिल को चीरता रोदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** बेहद दर्दनाक ख़ौफ की कालिमा सूरत की सीरत से स्तब्ध,भौंचक्का, चारों तरफ पसरा मासूम निर्दोष चीखती मौत का भष्मासुर अनल तांडव, मचा हाहाकार,दिल को चीरता रोदन कूदते,चिल्लाते,जलते देश के होनहार निर्माणक असहाय चिराग। मर्माहत सूना फिर ममता का आँचल, जला क्रूर असुर के दावानल में त्राहि-त्राहि जीवन रक्षण … Read more

हाय रे गरीबी

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** भूख में तरसता यह चोला, कैसे बीतेगा ये जीवन। पहनने के लिए नहीं है वस्त्र, कैसे चलेगा ये जीवन। किसने मुझे जन्म दिया, किसने मुझे पाला है। अनजान हूँ इस दुनिया में, बहुतों ने ठुकराया है। मजबूरी है भीख मांगना, छोटी-सी अभी बच्ची हूँ। सच कहूं बाबू जी, खिला … Read more

मिलना-रूठना…

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* उसने कहा- अगर देवी के दर्शन हो सकते हैं तो मैं मिलना चाहूँगा। मैंने कहा- मैं तो वापिस जा रही हूँ एक साल बीत गया। मैंने कहा- मुझे मिलना है तुमसे। उसने बहाने बना लिए, फिर वो बहाने ही बनाता रहा तीन साल तक। एक दिन मैंने कह दिया- मुझे अब … Read more

मुस्कराना जिन्दगी है..

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ फूल बनकर मुस्कराना जिन्दगी है, मुस्कुरा के गम भुलाना जिन्दगी हैl मिलकर लोग खुश होते हैं तो क्या हुआ, बिना मिले दोस्ती निभाना भी जिन्दगी हैll जिंदगी जिंदा दिलों की आस होती है, मुर्दा दिल क्या खाक जीते हैं जिंदगी। मिलना-बिछुड़ जाना तो लगा रहता है, जीते-जी मिलते रहना ही जिंदगी … Read more

एक बार और…

ऋतुराज धतरावदा इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* सोचता हूँ कुछ देर सुस्ता लूँ, झील किनारे बैठकर कहीं पीलूँ थोड़ा-सा मौन, खुद के अंदर उतरूँ जहाँ बरसों पहले, जाया करता था कभीl हर चीज को फिर सलीके से सजाऊँ, आईने को साफ कर वही पुराने कपड़े पहन, नजरभर खुद को भी देखूँ समय के साथ उग आई सलवटों पर … Read more

मच्छर

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** मच्छर को, कभी कम मत आंको। चूंकि, मच्छर घात लगाकर कभी वार नहीं करता। बल्कि, ललकारते हुए करता है आत्मघाती हमला, और चूस लेता है, मानव का रक्त अपनी जान की बाजी लगाकरl अब बताओ, करके गहन मंथन कि, क्या मच्छर उन तथाकथित अपनों से कहीं अधिक … Read more

कोयल की कुहूक

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** कोयल कुहूक-कुहूक कर बोली मोर पपीहा मेरे भाई, बंदर भालू ने दौड़ लगाई आपस में सब भाई-भाई। शेर-शेरनी ने ब्याह रचाया पंडित जी को घर पे बुलाया, हलुआ पूरी सेंवई बनाई जंगल में वो खूब लुटाया। हिरण मोर संग रास रचाया गजानंद को खूब खिलाया, तोते ने आवाज लगाई पिंजरे खोल,मुक्त … Read more

सत्य

डॉ.किशोर जॉन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************** मौत की कगार पे खड़ा सत्य, मौत के बाज़ार में,इंतज़ार में l तार-तार हो चुके हैं कपड़े सत्य को ढकते-ढकते l ख़ून भी सारा बह चुका, झूठ की तलवारों से। पसीना भी सूख चुका, असत्य की बयारों से। जीभ भी कंपकंपाती है, प्रतिकार भी शक्तिहीन-सा लाचार अंधत्व-सा छा गया है, असत्य … Read more