कैसे लिखूँ प्रेम गीत मैं
क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** अनय अधर्म का वर्चस्व चतुर्दिक प्रबल हो रहे अन्याय अत्याचार है, कवि! कैसे मान लूँ तेरे कहने पर प्रेममय यह मानव का संसार है? पशुत्व पूजित किया जा रहा अब मानवता आज त्रस्त व भयभीत है, सेवा करना छोड़ उस मानवता की बता तू ही कैसे लिखूँ प्रेम गीत मैं ? … Read more