क्या हश्र हुआ !

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* उनका प्यार पाने की मेरी कोशिशों का कुछ ना हुआ, मेरी मौत पर कहा-लग ही गयी,आखिर बददुआ। मुझे भी करना ही पड़ा,फिर शुक्रिया अदा उनका, उनका दिया कुछ तो था वो,जो मेरा अपना ही हुआ। मुझे देखकर छुप जाने की,नहीं जायेगी उनकी आदत इसी कोशिश में लगी रहीं,जबसे जनाजे में … Read more

दिल से देता हूँ वोट..

जसवंतलाल खटीक राजसमन्द(राजस्थान) ************************************************************* मैं सबको सुनाता हूँ लेकिन,मैं हूँ बहरा किसी की नहीं सुनता मैं ये,आज कह रहा। मैं दिल से देता हूँ वोट,पैसों से नहीं, मेरा वोट है मेरा हक,शान से कह रहा॥ ये चुनावी हथकंडे हैं,ये तो रोज आएंगे, ये हाथों को जोड़ कर,हमारे पाँव दबाएंगे। इन लोगों की बातों में,तुम कभी … Read more

गर्मी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** सर्दी जाती गर्मी आती, शुरू शुरू में यह सबको भाती। स्वेटर रजाई को दूर भगाती, जब वह अपने रंग में आती… सबको वह पूरा पूरा सताती॥ सूरज का रहता है प्रचंड रूप, बेहाल करता है जीवो को इसका धूप। बचने को ढूंढते हैं सब सुंदर छाया, कम ना … Read more

कत्लेआम

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* आज भावनाओं का भी देखो ऐसे कत्लेआम होता है। घर में मारकर बीबी को वो, बाहर खूब जोर से रोता है। ऐसे कत्लेआम… बेटी को भी ना छोड़े ये, ऐसा पिता भी होता है। लगे धब्बे जो दामन पे, सरेआम वो धोता है। ऐसे कत्ले आम… भाई का भाई … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-९ विधि को सुखद लगी यह जोडी, उसने आँखें चार करायीं यह कैसा संयोग अजब था, नजरें भी तलवार बनायीं। लगीं काटने वे सपनों को, देखा करती थी जो प्रति पल हमला करतीं आदर्शों पर, जिनसे रहता था मन उज्जवल। कभी कनखियों से वह देखे, कभी देखती उसे … Read more

भ्रूण हत्या बड़ा अपराध

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** भ्रूण हत्या है बड़ा अपराध इसे रोकें हम और आप, लड़का-लड़की में अंतर नहीं फिर क्यों होते है इतने अपराध। काजल नहीं सुंदरता का लो कालिख तुम पोत, ऐसा रूप सहेज लो जो हो सुंदरता का प्रतीक। माता तो माता होती है क्यों अपराधी के रूप, ऐसी गलती ना करो जो … Read more

अधीन

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** अधीन बहुत गहरे, मानदंड पितृसत्तात्मक मान-प्रतिष्ठा के नीचे दबी कुचली किरकिरी-सी, नहीं रत्तीभर जगह समा जाए वह पीठ वजन भर, खड्डे में उड़ेल भर लौटी प्राण-प्रतिष्ठा जगत में उपहास वह रोई, खुद ही देखी पराधीनता के भंवर में उठती धीरे-धीरे चिंगारी, किस दिशा अधीर अजीब छटपटाहट, पीड़ा से … Read more

‘मत’ की राजनीति

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** वायदों की फेहरिस्त बनाकर, जनता को नेता लुभा रहे हैं। झूठे-झूठे दिखा के सपने, सबको मूर्ख बना रहे हैं। अच्छे दिन तो कभी न आये, ना ही अच्छे दिन आयेगें। भरमा अपने वाग्जाल से, वाह! वाह! अपनी करा रहे हैं। बेरोजगारों को वेतन भत्ता, खातों में जमा होगा पैसा। नौकरी … Read more

जंगल के हम हैं फूल

डॉ.जयभारती चन्द्राकर भारती गरियाबंद (छत्तीसगढ़) *************************************************************************** जंगल के हम हैं फूल’ सदा हँसते और लहलहाते हैं ना हमें खाद की जरूरत, ना हमें ही नित पानी चाहिए बिना किसी देखभाल के, दिखते हैं कितने सुन्दर। जंगल के हम हैं फूल… ना किसी का संरक्षण, ना ही किसी का दुलार फिर भी हम जी लेते हैं, अपनी … Read more

मजदूर की आवाज

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* बदलते समय में बदलते रहेंगे, जीवन के दुर्गम मार्गों पर चलते रहेंगे, पूंजी की समरसता से, लड़ते रहेंगे। पिस नहीं पाएंगे, धन के पाटों के बीच, सह नहीं पाएंगे तुम्हारे पैरों की ठोकर, अब अपनी आवाज से तुम्हारी सोई हुई चेतना को, जगाते रहेंगे। होते विकास बदलते समाज में, कम मजदूरी … Read more