नारी इक अदभुत रचना
तृप्ति तोमर भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… कभी कही,कभी अनकही कविता, इसका जीवन तो है बहती सरिता। नारी है इक सुलझी-अनसुलझी पहेली, इसका हर इक रूप है मानो जैसे सहेली। खुद ही खुद की है इक अनोखी पहचान, अपनी ही शक्ति से रहती अनजान। लेती है हर कदम पर नया रुप, कभी … Read more