साजन
बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** साजन से सजनी कहे,मिलने को बेताब। मन मेरा लगता नहीं,देखे सुन्दर ख्वाब॥ आया मौसम प्यार का,बिखरे रंग अनेक। साजन प्यारा है लगे,वो लाखों में एक॥ साजन बिन सजनी नहीं,इक-दूजे का साथ। कस्में-वादें कर चले,लेकर अपने हाथ॥ सपने सुन्दर साजते,साजन सजनी संग। मीठा-सा अहसास है,पुलकित होते अंग॥ चैन नहीं … Read more