माँ तुम बहुत याद आती हो

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… देखता हूँ जब भोली,गैया-मैया, भरी ममता से,बछड़े को पुचकारती माँ तुम बहुत याद आती हो, अपनी बाँहों में,मुझको दुलारती। एक नन्हीं चिड़िया,हौंसलों से भरी, चोंच से,चूजों को दाना डालती माँ तुम बहुत याद आती हो, तकलीफें सहती,मुझको पालती। वह शेरनी,रानी के गर्व से भरी, अपने शावकों … Read more

माँ

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… पृथ्वी पर सबसे सुंदर रचना है माँ, ईश्वर का अनमोल उपहार है माँ। खामोश लबों की आवाज है माँ, निराकार में साकार रुप है माँ। छुपती नहीं है कभी कोई परेशानी, पल में सुलझाती हर उलझी कहानी। इस धरती पर साक्षात् ईश्वर है माँ, जन्म से … Read more

माँ

सुशीला जोशी  मुजफ्फरनगर(उतार प्रदेश) ************************************************************ मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… इतनी बड़ी हवेली में इकली कैसे रहती माँ, बड़ी-बड़ी विपदाओं को चुप-चुप कैसे सहती माँ। कमर झुकी जर्जर काया फिर भी चल-फिर लेती माँ, मुझे आता हुआ देखे रोटी सेक है देती माँ। खाँसी आती है माँ को झट से मुँह ढँक लेती माँ, मेरी नींद … Read more

मातृ पद महान

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… माँ का पद है जगत में, सब से श्रेष्ठ महान। न्याय प्रेम निस्वार्थता, जग को किया प्रदान। उच्च मातृपद ने दिया, नैसर्गिक उपदान। अधिकारिक निःस्वार्थता, अधिकाधिक बलिदान। माताओं में प्रेम का, कीर्तिमान निर्धार किया वहीं है वस्तुतः, जग जीवन आधार। माँ की ममता आंव कुएं-सी, झर-झर … Read more

माँ

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… माँ की ममता से बड़ा,नहीं मोल है आज। माता सम भगवान है,रखना इसकी लाजll जगजननी माँ रूप है,हम उनकी सन्तान। आओ जी सेवा करो,करो नहीं अपमानll रक्षा करना धर्म है,कभी नहीं हो पाप। बेटा चलो चुकाइए,कर्ज दूध का आपll माता है अधिकारिणी,बेटा देना प्यार। … Read more

माँ

पवन कुमार ‘पवन’  सीतापुर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………   माँ के आँचल से निज सुत पर,निर्झर नेह झरे। अम्बर ज्यों निज ओस-कणों से,शीतल अवनि करे॥ धरती-सा विस्तृत मन जिसका,कोमलकांत हृदय है। करुणा,नेह,दया,ममता का,मिश्रित रूप विलय है॥ प्यार,दुलार अपार लुटाती,सदगुण नित्य भरे। अम्बर ज्यों निज ओस कणों से, शीतल अवनि करे॥ माँ के जैसी … Read more

माँ ही परिभाषा

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… हर परिभाषा माँ से होती, माँ ही हर परिभाषा होती। माँ प्रेम का शब्दकोश है, और विजय का जयघोष है। जल-जल कर वह दीप नवल-सी, पल में तम सारा हर लेती। तन के सारे दर्द छुपाती, माँ दुलराती बचपन-सी। जेठ दुपहरी सावन जैसी, माँ है … Read more

शिक्षिका का मातृत्व रूप

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… रोज सुबह चाय का प्याला लेकर अखबार पढ़ना प्रतिभा की आदत है। आज भी रोज की तरह अखबार पढ़ने बैठी ही थी,कि दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। वह उठकर दरवाजे तक गई,तो देखा एक व्यक्ति फूलों का गुलदस्ता लिए खड़ा है। प्रतिभा को देखते ही बोला-“मैडम … Read more

माँ, हम तुम्हें ही…

हेमा श्रीवास्तव ‘हेमाश्री’ प्रयाग(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… हम बड़े हो गए माँ,तुम्हें समझाने लगे हैं, हम तुम्हें ही तुम्हारे फर्ज गिनाने लगे हैं। तुम उँगली पकड़ के चलना हमें सिखाती थी, हम तुम्हें ही छड़ी-बैसाखी थमाने लगे हैं। हम बड़े हो गए माँ,तुम्हें समझाने लगे हैं, हम तुम्हें ही तुम्हारे फर्ज गिनाने लगे … Read more

मैं तो,माँ हूँ

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* मातृ दिवस स्पर्धा विशेष………… नौ माह गर्भ के खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ, असहनीय प्रसव पीड़ा के बाद, जब मैंने तुझे जन्म दिया, अपनी गोद में लिया क्षण भर में भूल गयी, सब दर्द सब पीड़ा। एक सुखद अहसास, मातृत्व का तुमसे पाया, तुमने माँ का नाम दिया मुझे, जब तुमने … Read more