यूक्रेनः भारत पहल क्यों न करे ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर भारतीय लोगों की नजरें शुरु से गड़ी रही हैं लेकिन १ भारतीय छात्र की मौत ने देश के प्रचारतंत्र को हिलाकर रख दिया है। सरकार की तरह भारत की जनता भी अब तक बिल्कुल तटस्थ थी। वह रूस और यूक्रेन के इस युद्ध को एक तटस्थ … Read more

मातृभाषा अर्थात स्वभाषा का महत्व

डॉ. विजय कुमार भार्गवमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ स्वतंत्रता सैनानियों ने अपना बलिदान इसलिए दिया था कि उनका देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होकर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बने। उसके लिए उनका मानना था कि भारतीय भाषाएँ हर क्षेत्र में प्रतिष्ठापित हों और हिन्दी भारत की सम्पर्क राष्ट्रभाषा बने। क्या उनका सपना पूरा हुआ या आज मानसिक गुलामी … Read more

शिव यानि कल्याणकारी

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** शिवरात्रि विशेष…. यह शाश्वत सत्य है कि हम दुनिया में मानव रूप में आए हैं तो जग कल्याण हमारा धर्म है। कल्याण करना एक शाश्वत सत्य है। जो सत्य है,वह सुन्दर न दिखते हुए भी सुन्दर होता है। कल्याणकारी कार्य एक सनातन सत्य है। जो सत्य है,वही शुभ है। इसीलिए यह उक्ति … Read more

आतंक का जवाब आतंक नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* २००८ में अहमदाबाद में हुए आतंकी हमले के अपराधियों को विशेष अदालत ने जो सजा सुनाई है, वह स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी सजा है। इसमें ३८ अपराधियों को मृत्युदंड, ११ को उम्रकैद और ४८ पर २.८५ लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसके पहले राजीव गांधी हत्याकांड में २६ लोगों को … Read more

पद-प्रभाव का दुरूपयोग विचारणीय

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** प्रजातंत्र में चुने हुए प्रतिनिधियों को विधायिका मानते हैं,उनके अधीनस्थ कार्यपालिका निश्चित रूप से उनकी सहायता करने,उनकी मंशाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होती या रहती है। बहुत सीमा तक न्यायपालिका भी अप्रभावित नहीं रहती है। बुद्धिमान राजा यानी वर्तमान में प्रधान मंत्री को स्वयं और अधीनस्थों को यानी मत्रियों को निम्न … Read more

यात्रा और जीवन

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* आज से ७ वर्ष पहले एक बूढ़ा व्यक्ति रात्रि के ठीक १२ बजे के बाद किसी पशु के सिर व टाँगें लाकर दूर एक इमारत के गेट के समक्ष अच्छी-खासी मात्रा में प्लास्टिक के थैले से निकालकर डाल देता,और भूख से बेहाल श्वान उसके आगे-पीछे दुम हिला-हिला कर घूमते रहते। सही … Read more

‘कोरोना’ के फायदे

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* दुनिया में एक से बढ़कर एक लोग हैं जो अवसर को सबसे पहले पहचान जाते हैं,और उसका भरपूर फायदा उठा लेते हैं। जब ‘कोरोना’ काल शुरू हुआ और इसके निदान के लिए समय-समय सरकारी आदेश आने लगा,जिसमें कहा गया कि ‘कोरोना होने की  प्रयोगशाला की रिपोर्ट ऑफिस में जमा करने पर … Read more

भारत माता का राजदुलारा चन्द्रशेखर आजाद

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** पुण्यतिथि (२७ फरवरी) विशेष भारत राष्ट्र को स्वतन्त्रता दिलाने हेतु प्राण निछावर करने वाले स्वतन्त्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद( बचपन का नाम चन्द्रशेखर सीताराम तिवारी)एक ऐसे सेनानी थे जो अंग्रेजों के हाथों कभी भी जीवित गिरफ्तार न होने की अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहे। इसी के चलते वे न केवल पूरे विश्व … Read more

मन की वेदना हरें

अरुण वि.देशपांडेपुणे(महाराष्ट्र)*************************************** मित्रों,हम सब खुद को हमेशा ही संवदेनशील मन का व्यक्ति समझते हैं। यह स्वभाव विशेष हमारा दायित्व बढ़ाने वाला है। मन की पीड़ा,अंतर्मन की वेदना किसी के साथ जब हम साझा करते हैं तो मन का बोझ हलका होता है, लेकिन वर्तमान इतना भयंकर हो गया है कि हमारे बीच का संवाद कम … Read more

भारत:सच्चा लोकतंत्र लाने में देर नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* दुनिया के किन-किन देशों में कैसा-कैसा लोकतंत्र है,इसका सर्वेक्षण हर साल ब्लूमबर्ग नामक संस्था करती है। इस साल का उसका आकलन है कि दुनिया के १६७ देशों में से सिर्फ २१ को आप लोकतांत्रिक कह सकते हैं। ५६ देश खुद को लोकतांत्रिक बताते हैं लेकिन वे लंगड़ाते हुए लोकतंत्र हैं। याने दुनिया … Read more