चिंगु

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* दिवाली की छुट्टियाँ नजदीक आ रही थीं। बच्चों ने मनाली,शिमला,नैनीताल आदि घूमने की मांग पहले से ही रख दी थी। भला बच्चों को मना भी कैसे किया जाए। इसी बहाने घर से बाहर निकालना भी हो जाता है और बच्चों के साथ एक बार फिर बच्चा बन बचपन जी … Read more

सूर्य तुम्हें ही बनना है

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’  इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** नश्वर जग है आत्मदीप बन तुम्हें निरंतर जलना है, तम की घोर निशा के आगे सूर्य तुम्हें ही बनना है। करो साधना इष्टदेव की, पुण्य करो संचित केवल। स्वार्थ लोभ का त्याग करो तुम, ज्ञान भक्ति का ले संबल। भटक रहे हो जन्म-मरण के, चक्र का भेदन करना … Read more

कर प्रयास

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** मत कर बात निराशा की, प्रयास करना आज़ सीख। हौंसले रूपी क़लम से तू, जीवन की परिभाषा लिख। शंका और चिंता,है दीमक, दिमाग में कभी तू मत पाल। कर सकता है गगन में सुराग़, तबियत से पत्थर तो उछाल। तेरे हाथों में वो जादू है प्यारे, पत्थर भी हँसने … Read more

वाह री राजनीति…

राज कुमार चंद्रा ‘राज’ जान्जगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़) *************************************************************************** वाह री राजनीति,गजब खेल दिखाती है, दुश्मन को दोस्त और दोस्त को दुश्मन बनाती हैl सत्ता का लालच,पद की चाह है, जिधर मतलब निकले,बस उधर ही राह हैl न किसी से वास्ता चुनाव के पहले सबके हैं, चुनाव खत्म तो सबसे हट के हैं पटेल,शास्त्री,को भुला दिया,भुला दिया … Read more

आभास

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* आज हृदय में एक अनोखी, पीड़ का आभास है। पुष्प की ज्यूँ पाँखुड़ी में, सुवास का वास है। वेदना के अधरों पर अनमनी-सी मुस्कान है, व्याकुल नयनों की छलकी गगरीl मन की बस्ती वीरान है, दिवस परेशान और संध्या उदास है। आज हृदय में एक अनोखी, पीड़ का आभास हैll … Read more

करुण क्रंदन

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** इंसानियत कर रही आज, करुण क्रंदन। दिखता नहीं कोई सच्चा, सभी लगाए हुए है चंदन। बूढ़े बच्चे और जवान, बचा नहीं किसी में इंसान। कौन बड़ा कौन है छोटा, भूल गए है पहचान। क्या प्यार क्या मोहब्बत, मिट गए सभी अरमान। रिश्ते-नाते सभी गये भूल, हो गए सबके सब बेजान। … Read more

झूठ ही मुस्कुरा दिया होगा

गोविन्द राकेश दलसिंहसराय (बिहार) *************************************************************** झूठ ही मुस्कुरा दिया होगा। दर्द दिल का छुपा दिया होगा। आख़िरी साँस थमने से पहले, हाथ अपना हिला दिया होगा। पाँव तो उठ सका नहीं उसका, भूख ने भी सता दिया होगा चीख़ भी ज़़ोर से नहीं पाया, आह को भी दबा दिया होगा। आँख उसकी हुई ज़रा-सी नम, … Read more

कामचोरी

डॉ.शशि सिंघल दिल्ली(भारत) ********************************************************************************* नवम्बर का महीना था। ठंड ने अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए थे। अभी कंपकंपाने वाली ठंड नहीं थी,मगर सूरज चाचू मद्धम-मद्धम तेज के साथ चल रहे थे। हल्की-हल्की गुलाबी ठंडक के चलते सूरज से सेंक लेना सुहाने लगा था। गली-मुहल्ले की महिलाएं अपने-अपने काम से निपटकर घर के बाहर बेड़े … Read more

कभी तुम आओगी…

कुँवर बेचैन सदाबहार प्रतापगढ़ (राजस्थान) ********************************************************************** ‘हमको फरक नहीं पड़ता’ या ‘हमें क्या अधिकार है!’,ये पंक्ति हम दोनों के बीच बोली जानी वाली सबसे झूठी बात थी। पता नहीं क्यों,मग़र मुझे लगता है कि जब आपसे ऐसा कोई बोलता है तो सबसे ज्यादा फर्क उसी को पड़ता है जो इसको बोलता है। वो बात अलग … Read more

हिन्दी भाषा

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* हिन्दी हिन्दुस्तान की,भाषा मात समान। देवनागरी लिपि लिखें,सत साहित्य सुजान। सत साहित्य सुजान,सभी की है अभिलाषा। मातृभाष सम्मान,हमारी अपनी भाषा। सजे भाल पर लाल,भारती माँ के बिन्दी। भारत देश महान,बने जनभाषा हिन्दी। भाषा संस्कृत मात से,हिन्दी शब्द प्रकाश। जन्म हस्तिनापुर हुआ,फैला खूब प्रभास। फैला खूब प्रभास,उत्तरी भारत सारे। तदभव-तत्सम शब्द,बने नवशब्द … Read more