गौरेया अँगना में आजा..

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** गौरेया इंसानों के साथ रहने वाला छोटा पक्षी(चिड़िया) वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर जा पहुंचा है। ये छोटे-छोटे कीड़ों को खाकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में सहायक है। गौरेया के कम होने का कारण विकिरण का प्रभाव तो है ही,इसके अलावा उनकी देखभाल पर इंसानों का ध्यान कम … Read more

हिन्दी भाषा

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** ऐ हिन्द में रहने वालों, हिन्दी का मान बढ़ाओ। हिन्दी भाषा की ही तुम… हिन्दी भाषा की ही तुम, सारे जग में अलख जगाओ। जय हिन्द,जय हिन्द,जय हिन्दी भाषा, जय हिन्द,जय हिन्द,जय हिन्दी भाषा। जब अंग्रेजी था शासन, तब बनकर उसने रावण हिन्दीभाषी को कुचला… हिन्दीभाषी को कुचला, … Read more

शिक्षा

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** शिक्षा का उद्देश्य है, नर चरित्र निर्माण। ईश्वर-आत्मा-सत्य की,.com हो जिससे पहचान। शिक्षा है चरित्र का, साधन क्रम अनुकूलl साध्य वस्तु चरित्र है, शिक्षा साधन मूल। जो इसके निर्माण में, हो सहायक नेकl उस शिक्षा का लाभ क्या, जिसके दोष अनेक। है यदि आत्म विकास का, शिक्षा मूल उद्देश्यl आशा … Read more

पलायन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** गाँव और खलिहान सब, रहते थे भरपूर। घर-घर में खुशियां भरी, पुष्प बिखेरे नूरll गरमी या बरसात हो, या सर्दी हेमंत। चहल-पहल थी गाँव में, सुनते वाणी संतll हुआ आज क्या अचानक, गाँव हुए वीरान। धरती बंजर है पड़ी, बाग खेत खलिहानll घरों में ताले हैं पड़े, आँगन उगी है … Read more

देश बचाना हमारा भी कर्तव्य

ममता बनर्जी मंजरी दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) ****************************************************************************** सम सामयिक मुद्दा-प्रदूषण और पर्यावरण……… हेमंत ऋतु के आगमन के साथ ही त्योहारों का सैलाब आ पड़ाl धनतेरस,काली पूजा,दीपावली,गोवर्धन पूजा,चित्रगुप्त पूजा,भाईदूज और छठपूजा हो गई। धनतेरस के अवसर पर सोने-चाँदी के आभूषणों और बर्तनों की खरीद-बिक्री होती है। कालीपूजा में शक्ति रूपिणी माँ की पूजा होती है,तो दीपावली में लक्ष्मी-गणेश … Read more

किसी सूरज `बेटे` की ही हो सकती है ऐसी पूनम `माँ….

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** यह वास्तव में कलेजा चीर देने वाला मार्मिक प्रसंग है। इसे श्रद्धांजलि कहना,उसकी हृदय विदारकता को कम करना है। जिसने भी फैलता हुआ वह वीडियो देखा,सन्न रह गया,क्योंकि एक माँ ही अपने कलेजे के टुकड़े के लिए ऐसा कर सकती है। दुखों के पहाड़ को सात सुरों की सरगम में समेटने … Read more

कल को आज में जीयो

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** जो लोग कल में, आज को ढूंढते हैं। और खुद कल में जीते हैं, वो बड़े बदनसीब होते हैं। क्योंकि कल जिंदगी में, कभी आता ही नही। इसलिए,मैं कहता हूँ, कि आज में जी कर देखो। जिंदगी होती है क्या, खुद समझ जाओगेll कल के नाम पर, आज में जी न … Read more

जनतंत्र में जनभाषा ही होनी चाहिए न्याय की भाषा

जम्मू-कश्मीर राज्य का उर्दू भाषा से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा। उर्दू का उदय दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में ही हुआ था। कश्मीर में तो इस्लामिक शासन भी नहीं था,वहाँ तो हिंदू राजा हरि सिंह का शासन रहा, लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात इस्लामिक कट्टरता और प्रभाव के कारण कश्मीरियत की बात करनेवाले … Read more

दीपावली मिलन में बिखरी काव्य फुलझड़ियां

देवास l साहित्य संस्था,संस्कृति साहित्य रचनालय ‘संसार’ (देवास) के संयोजन में दीपावली मिलन काव्य गोष्ठी २ नवम्बर को त्रिभुवन शर्मा के निवास (कर्मचारी कालोनी) पर आयोजित की गई। देवास के जाने-माने कवि-शायरों ने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए अपनी बेहतरीन कविता व शायरियों से कार्यक्रम को यादगार बनाया। इस गोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थापक प्रभाकर … Read more

डाकिया

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* निर्मला एकांत मन से ब्रीफकेस से निकली हुई चिट्ठी पढ़ रही है। “दादी…दादी,क्या पढ़ रहे हो ? मुझे भी दिखाइए!” सात वर्षीय पोते अभिज्ञान ने जिज्ञासा भरी नजरों से चिट्ठी देखकर निर्मला से पूछा। निर्मला ने जवाब दिया,”ये तेरे दादा जी की चिट्ठी थी। आज इस ब्रीफकेस में से निकली।” … Read more