पावस
दुर्गेश राव ‘विहंगम’ इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** तरु की डालियाँ झूम उठी, मचल रहे हैं पल्लव सर-सर चलती समीरl मन में उठे उमंग, चलो झूम उठें वर्षा के संगl हर बूंद में हीरे-सा नीर, दादुर बोले टर-टर चम-चम चमके दामिनीl काला मेघ आया चारों ओर वसुधा पर छाया, कल-कल बहती नदिया, खेले संग नीर के मछलियाँl भास्कर … Read more