`राष्ट्रीय शिक्षा नीति` पर मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र:संपर्क भाषा `हिन्दी` को महत्व और गौरव देने की पुरजोर मांग

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक मानव संसाधन विकास मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय,भारत सरकार नई दिल्ली–110 001 विषय:राष्ट्रीय शिक्षा नीति, महोदय, आपके मानव संसाधन विकास मंत्री नियुक्त होने पर मैं आपका अभिवादन और अभिनंदन करता हूँ। आशा करता हूँ कि आप जैसे कर्मठ और परिश्रमी व्‍यक्ति के नेतृत्व में यह मंत्रालय … Read more

अब हर भारतवासी समान

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** कश्मीर की कलियां खिलने लगेंगी, वो अब अपने-आपसे मिलने लगेंगी। अम्बर का भी मन नहीं अब दुखी होगा, वहां का जीव-जगत अब सुखी होगा। न अब हमारे तिरंगे का अपमान होगा, अब हर भारतवासी समान होगा। न अब वहां राष्ट्रवाद के झगड़े होंगे, सब समान कमजोर और तगड़े होंगे। अब एक … Read more

हाँ,व्यथित हूँ मैं…

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* देख के भारत माँ को वक़्त ये बोला- अंग-अंग है झूम रहा तेरा,छाई चहुँओर खुशहाली है, फिर क्यों व्यथित,क्यूँ आँख में तेरी पानी है ? बोली भारत माँ-“हाँ हूँ व्यथित मैं” मैं व्यथित हूँ उस बच्ची के लिए… जिसने सीखी थी अभी-अभी बोली, हवस के भूखे दरिंदों ने … Read more

जवानों को सलाम

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ सलाम करते हैं हम, उन वीर जवानों को। जिनके दम पर हम, घरों में आराम करते हैं। और वो देते हैं पहरा, सीमा पर खड़े होकर। उन्हीं के दम पर हम, अमन-चैन से रहते हैं॥ उन्हें क्या मिलता है, देशसेवा करने से। किसने उनसे पूछा, कभी उनकी मर्जी को। उनके सीने … Read more

मतदान

सुकमोती चौहान ‘रुचि’ महासमुन्द (छत्तीसगढ़) ********************************************************************************** जनता मेरे देश की,करे सभी मतदान। जागेंं निज हित के लिए,हक अपना पहचान हक अपना पहचान,राष्ट्र समृद्ध बुनिए जी। सबसे यही अपील,योग्य नेता चुनिए जी। कहती ‘रुचि’ करजोर,समय में ही फल पकता। लोकतंत्र की नींव,प्रगति अब चाहे जनता। परिचय-श्रीमती सुकमोती चौहान का साहित्यिक नाम ‘रुचि’ है। जन्मतारीख-५ नवम्बर १९८२ … Read more

बुलावा

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* जब बुलावा माता का आता, हम मंदिर-मंदिर जाते हैं। पहाड़ों के हों या मैदान के, सबमें माँ के दर्शन हो जाते हैं। सुनो,जब बुलावा मेरा आया, मैं श्री केदारनाथ जा पहुंची थी। चल नहीं पाती थी दस कदम भी, वहां चौदह किलोमीटर पैदल चली थी। बगैर बुलावे के तो … Read more

सावन और बुआजी का आना

सुनील जैन राही पालम गांव(नई दिल्ली) ******************************************************** सावन और बुआजी हर साल आते हैं। सावन के आते ही बच्‍चे खुश हो जाते हैं। सावन की बारिश में नहाने का मजा,पानी में कूद कर लाला जी की धोती को गंदा करने का आनंद और लाला जी का हमारे पीछे-पीछे दौड़ना। मास्‍टरजी साइकल से आते हैं। उनकी पीठ … Read more

स्वाधीन भारत बनाम रक्ष्य वचन पर्व

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधा लो राखी। इस राखी में छुपी हुई है,अरमानों की साखी॥ चंदन रोरी अक्षत मिसरी,आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो समझो,हम हैं बहुत अभागे॥ क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी ? अथवा कोई और वजह है,मुझे बता दो भाई ? अब आँखों … Read more

सड़क बेचारी

डॉ.दिलीप गुप्ता घरघोड़ा(छत्तीसगढ़) ******************************************************** सड़क बेचारी गूंगी दुखियारी देखती है चुपचुप, आदमी का दु:ख.. आदमी की भूख…, प्रशासन को चुप्प… और महसूसती है हवा का रुखl गिरगिट की तरह घड़ी-घड़ी रंग बदलता आदमी, बोराया;कुकुर-सा भौंकता भागता काटता आदमी, एक-दूजे को चीरते-फाड़ते औ चीरते-फाड़ते आदमी, चुप्प सब देखती है वक्त की मारी, गूंगी बन रहती है … Read more

‘प्रेम’ यानि आत्मा से आत्मा का मिलन

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* संसार में अलग-अलग स्वभाव के अलग-अलग व्यक्ति हैं। सभी में अलग-अलग कुछ विशेष गुण होते हैं,जिसे व्यक्तित्व कहते हैं। कुछ विशेष व्यक्तित्व विशेष व्यक्ति को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। यही आकर्षण जब एक-दूसरे के विचारों में मेल पाता है। एक-दूसरे के लिए त्याग का भाव अनुभव करता है,एक-दूसरे के लिए … Read more