चंद्रयान

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* कहता था कवि कभी प्रेयसी से- “चाँद पर घर बनाऊँगा”, इसरो ने किया वादा,सपना मैं सजाऊँगा। आज अभिनंदन हर जन कर रहा, छोड़ दिया चंद्रयान-२,घर वहीं बनाऊँगा। दुनिया पग में काँटे लाख बिछाए, लाख करे बदनाम,संघर्ष कर लड़ जाऊँगा। नहीं चाहिए साथ किसी का,न किसी का नाम, अपने … Read more

ओ मेघ अब तो बरस जा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** सूखी धरा तरसे हरियाली, जाती आबिया लाएगी संदेशा माटी की गंध का होगा कब अहसास हमें गर्म पत्थरों के दिल कब होंगे ठंडे, घनघोर घटाओं को देख नाचते मोर के पग भी अब थक चुके, मेंढक को हो रहा टर्राने का भ्रम ओ मेघ अब तो बरस जा…। छतरियां,बरसाती भूली … Read more

हाय रे संस्कार

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** हाय रे संस्कार, प्रगति में दुर्गति हो गयी…कहाँ से लाऊं प्यार, हाय रे संस्कारl अब बेटा ना मिलता राम-सा, रहा ना भाई का भाई से प्यार बात-बात पर होती सास-बहु में तकरार, हाय रे संस्कार। पैदा होते बेटा,बाप को कहता यार, शिष्य कहे गुरु से-तुम्हें नहीं पता जीवन … Read more

फौजी

देवेन्द्र कुमार ध्रुव गरियाबंद(छत्तीसगढ़ ) ************************************************************************** वतन परस्ती के जमाने में बनते हैं किस्से, देश पर मर मिटने वाले होते हैं फरिश्ते, वो मरकर भी,दुनिया में अमर हो जातेे हैं, शहादत आती है,जिन लोगों के हिस्से। दिल में रखते हैं जज्बा,रगों में होता जुनून, देश के काम आकर पाते हैं,चैन और सुकून, किसी भी बात … Read more

वंदे मातरम

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* वंदे मातरम,वंदे मातरम, वंदे मातरम प्यारे वतन। मेरा भारत आन है मेरी, इसको बारम्बार नमन॥ सदियों पहले देश हमारा, जगत गुरु कहलाता था। ज्ञान,भक्ति और कर्मयोग का, सारे जग का दाता था॥ पर कुछ गद्दारों के कारण, अपना मुल्क गुलाम हुआ। कई बार इनके ही कारण, भीषण कत्ले आम हुआ॥ आओ … Read more

हरियाली

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) *********************************************************************** पौधे एक लगाकर देखो,हरियाली छा जाएगी, महक उठेंगे बाग-बगीचे,पक्षी गाना गाएंगे। झूम उठेंगे पौधे सारे,नदियाँ भी लहरायेगी, चहक उठेंगे पक्षी सारे,अपनी प्यास बुझाएंगें। हरे-भरे पेड़ों की छाया,राही भी सुस्तायेंगे, खूब लगेंगें मीठे फल जब,बड़े मजे से खाएंगे। शुद्ध हवा जब आयेगी तो,दिल भी खुश हो जायेगा, रहें स्वस्थ बच्चे-बूढ़े … Read more

हिन्दी-महिमा

शकुन्तला बहादुर  कैलिफ़ोर्निया ********************************************************* भारत में जो रची बसी है, वह जनभाषा है हिन्दी। भारत माँ के माथे की है, वह प्यारी-सी बिन्दी॥ उत्तरदिशि केदारनाथ में, गूँज रही है ये हिन्दी। दक्षिण में रामेश्वरम तक, व्याप रही अपनी हिन्दी॥ पूर्व दिशा में जगन्नाथपुरी, में भी तो छाई हिन्दी। पश्चिम में है बसी द्वारिका, वहाँ भी … Read more

अंतर्मन की आवाज

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** पूछो तो अंतर्मन से अपने, जग में तुमने क्या गंवाया। हर जगह कहता फिरता, ये दुनिया बस मोह-माया। कह देना आसान बहुत है, मुश्किल जीवन में उतारना। गड़गड़ाना अलग बात है, और बादल का बरसना। झूठ ना बोले आत्मा कभी, चाहे चेहरे पे लगा ले नक़ाब। स्वार्थ में इतने … Read more

तुम्हारे हृदय से

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** अपना सुर तुमसे मिलाकर गीत बनाया शब्द सजाकर, गूंज उठे उपवन गुलशन होंठों पर इक लय गुनगुनाकर। अपना… सुगंध से महक गई बगिया फूलों पर आ गई तितलियां, लेने लगी वो भी अंगड़ाईयां दूर हुई सबकी तन्हाईयां। अपना सुर… जबसे तुम्हारा सहारा हुआ हर पल समझो हमारा हुआ, दिल के अंदर … Read more

स्मरण शिखर के संघर्ष का

जीवनदान चारण ‘अबोध’   पोकरण(राजस्थान)  ****************************************************************** कारगिल विजय दिवस स्पर्धा विशेष………. भूले नहीं हम दुर्गम,ऊँचे प्रखर,प्रस्तर,पाषाणों को, माह मई सन् निन्यानवे जिन पर खेला होली को। कारगिल केवल युद्ध नहीं,वीरों की अमर कहानी है, घाटी में लड़ा हर वीर सपूत,माँ भारत का सेनानी है। मिग-२७ संग नचिकेता,अमरीकी जेट जला गया, मातृभूमि की बलिवेदी पर,प्राणों को तिल-तिल चढ़ा … Read more