मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘रामनवमी’ (२६ मार्च) विशेष…. रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन-दर्शन केवल आस्था … Read more

कृत्रिम मेधा:भारतीय भाषाओं के डाटा की कमी अत्यंत गंभीर मुद्दा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विश्व की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, मीडिया, प्रशासन और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार विशाल मात्रा में उपलब्ध … Read more

उपवास, दिनचर्या और खान-पान में समन्वय आवश्यक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नवरात्र भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक पर्व है, जो आत्मशुद्धि, साधना और संयम का संदेश देता है। यह केवल देवी आराधना का ही अवसर नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन स्थापित करने का भी एक श्रेष्ठ माध्यम है। इन नौ दिनों में उपवास, दिनचर्या और खान-पान के … Read more

अनुकरणीय भगवान् श्री राम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘रमणे कणे कणे इति राम’ यानी जो कण-कण में बसे, वही राम है। श्री राम के विषय में सनातन धर्म में अनेक कथाएं एवं गाथाएं विद्यमान हैं। श्री राम जी के जीवन की अनुपम कथाएं महर्षि वाल्मीकि जी ने अत्यंत सुंदर शब्दों में रामायण में प्रस्तुत की हैं। इसके अतिरिक्त गोस्वामी तुलसीदास … Read more

हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)… ‘२३ मार्च’ इस दिन भारत के ३ सपूतों शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी की सजा को गले लगा लिया था। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से नमन करता है।भारत में शहीदों के सम्मान और देश के … Read more

अक्ल बड़ी या भैंस ?

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हमारे शरीर की समस्त चेष्टाओं का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है, जिनमें अग्रणी है बुद्धि बल। इस बल के आगे सभी बल फीके पड़ जाते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ शारीरिक बल पर बुद्धि ने विजय पाई। बुद्धिमान लोगों ने अपने बुद्धि बल से साम्राज्यों के उत्थान पतन में बहुत बड़ी … Read more

‘कृत्रिम मेधा’ और मानवीय रिश्ते

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** समय की संध्या और सुबह के संगम पर खड़ा आधुनिक मनुष्य एक ऐसे युग का साक्षी है, जहाँ संवाद की सरिता अब शब्दों से अधिक संकेतों, स्पर्शों से अधिक पर्दे (स्क्रीन) और संवेदनाओं से अधिक सॉफ्टवेयर के सहारे बह रही है। ‘कृत्रिम मेधा’ ने न केवल कार्य और व्यापार की दुनिया … Read more

‘मनोरंजन’ की गिरावट और ‘मौन’ सेंसर बोर्ड

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के दौर में इन दिनों शायद सेंसर बोर्ड ने भी देशवासियों की बुद्धि को कृत्रिम ही समझ लिया है, वरना क्या बिसात कि ‘सरके चुनर तेरी सरके’ जैसा द्विअर्थी गीत बाज़ार में आ जाता।इस गीत में कलाकारों के रूप में नर्तकी नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त दिखाई देते … Read more

वनों को संसाधन नहीं, जीवन का अभिन्न अंग मानें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस’ (२१ मार्च) विशेष… २१ मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस’ केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती की ओर संकेत करने वाला अवसर है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष २०१२ में इसकी घोषणा इस उद्देश्य से की गई थी कि … Read more

मन से डर निकाला जाए

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ हमारे भारतवर्ष में पुरातनकाल से धन की देवी लक्ष्मी, शक्ति की देवी दुर्गा तो विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती रही है।‘यत्र नार्यंतु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः’ यानी जहाँ स्त्री का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।आज नारी निर्बल नहीं है, वरन् उसका सबल पक्ष देखने को … Read more