नई शिक्षा नीति के संबंध में कुछ सुझाव:मौलिक चिंतन मातृभाषा में ही

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र) *************************************************************** स्वाभाविक रूप से मौलिक चिंतन मातृभाषा में होता है,लेकिन भारत में तेजी से बढ़ रहे अंग्रेजी माध्यम के चलते बच्चा जो स्वभाविक रूप से मातृभाषा जानता है,अंग्रेजी नहीं,वह विवश होकर बचपन से बिना समझे पाठ्यसामग्री को रटने लगता है। इसके कारण धीरे-धीरे उसकी तर्कसंगत व मौलिक चिंतन की स्वाभाविक … Read more

जो जोखिम लेते,वे रचते इतिहास

सत्यम सिंह बघेल लखनऊ (उत्तरप्रदेश) *********************************************************** खुद को आरामदायक स्थिति में बनाए रखने के लिए हम परिस्थितियों को ही वजह बनाते रहते हैं। कभी समय का अभाव,कभी भाग्य को दोष देना,तो कभी आर्थिक,शारीरिक,मानसिक स्थिति को ढाल बनाकर खुद को कमजोर साबित करते रहते हैं। सच तो यह है कि,हम भागते हैं, वास्तविकता से दूर भागते … Read more

शिक्षा जगत की तस्वीर कई स्तरों पर बदलने की जरूरत

प्रेमपाल शर्मा  **************************************************************** खुशी की बात यह है कि ३० मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण करने से पहले ही १०० दिन के जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं,उसमें शिक्षा भी शामिल की गई है। उसी के अनुरूप ३१ मई को नए मानव संसाधन मंत्री पोखरियाल के कार्यभार संभालते ही कस्तूरीरंगन रिपोर्ट देश के … Read more

हम क्यों खेलें आतंकियों के हाथ में !

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** बिश्केक में चल रहे शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में सारा फोकस ही बदला हुआ लग रहा है। भारतीय टी.वी. चैनल और अखबार ऐसा दर्शा रहे हैं,जैसे यह आठ राष्ट्रों की बैठक भारत-पाक तनाव को लेकर ही हो रही है। वास्तव में इस बैठक का असली मुद्दा यह है … Read more

प्रगति रोकना है परिवर्तन ना स्वीकारना

अलका जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** जीवन का पहला सबक होना चाहिए परिवर्तन में आस्था काl यह बुनियादी पाठ है। न काम पर काबू से का न कोध पर काबू पाने का,जीवन का धर्म होना चाहिए,परिवर्तन में अटूट आस्था का। हालांकि,परिवर्तन को मन कभी सहज रुप से स्वीकार नहीं करता हैl मन भागता है परिवर्तन से दूर,परे,जबकि … Read more

हिन्दी तो भारत की मिट्टी,पहल ऊपर से हो

महेश रौतेला **************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल……….. ये नाटक बाजी लग रही है। हिन्दी क्यों पढ़ें! क्या सरकारों ने हिन्दी(जहाँ हिन्दी प्रथम भाषा है) को रोजगार,शिक्षा,न्याय, प्रशासन में पूर्णतः(अंग्रेजी रहित) लागू कर दिया है! नहीं। वहाँ अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर दी है ?नहीं। केन्द्र सरकार की नौकरियों में … Read more

भाषाई दीवार को गिराने में `देवनागरी` की महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ.प्रो.पुष्पेन्द्र दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल………. आज के जमाने में भाषाएँ भारत को तोड़ने का काम करेंगी। हरेक प्रान्त और हरेक व्यक्ति को अपनी भाषा से प्रेम और लगाव होना अनुचित नहीं है,लेकिन हमें यह बात भी नहीं भूलना चाहिए कि भाषा के आधार से दुनिया में … Read more

बलात्कारियों को फांसी दी जाए

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बकरवाल समुदाय की एक मुस्लिम लड़की के साथ पहले बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। वह लड़की सिर्फ आठ साल की थी। उसे एक मंदिर में ले जाकर नशीली दवाइयां खिलाई गईं और फिर उक्त कुकर्म किया गया। उन अपराधियों पर … Read more

ऊर्जा और शक्ति का उपयोग सही दिशा में कीजिए

सत्यम सिंह बघेल लखनऊ (उत्तरप्रदेश) *********************************************************** संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं,जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असम्भव हो। प्रयत्न और पुरुषार्थ से सभी कुछ पाया जा सकता है,किन्तु हम अपनी अधिकांश शक्ति तथा ऊर्जा को व्यर्थ की बातों और कामों में गवां देते हैं, जबकि हम अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करके … Read more

अलीगढ़ काण्ड अमानवीयता की चरमोत्कर्ष घटना

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** इस देश में जितनी गंगा- जमुनी तहज़ीब की प्रशंसा और दुहाई दी जाती है,और उसके विपरीत कृत्य होते हैं तो इसका क्या आशय हो सकता है ? एक क्षण की भूल जिंदगीभर के लिए गुनहगार बना देती है। कहते हैं कि रमजान का महीना बड़ा साक-पाक माना जाता है,जिस दौरान कोई … Read more