खेल भावना हो सही

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** खेल भावना हो सही,तभी मिलेगा मान। रौशन होगा नाम फिर,दुनिया हो हैरानll खेलो देश विदेश में,लहरे परचम आज। रहे सभी सदभावना,करें सभी फिर नाजll अपने लिए नहीं वरन,खेल देश सम्मान। गर्व करो तुम देशहित,खुद का होगा मानll कपट-द्वेष मन में नहीं,सबमें प्रेम समाय। यही खेल की भावना,जिससे सब … Read more

घर की रौनक बच्चे

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** बच्चे मन के होते सच्चे, सुन्दर कृति ईश्वर की सौन्दर्यमय उनकी लीलाएं, मन मोहते,लोगों का। चहक-चहक कर फुदकने लगते, घर-आँगन में खुशियाँ बिखेरते मन भी उनके निर्मल होते, हृदय से सरस भाव झलकते। माता-पिता की आँखों का तारा, उनसे है जग में उजियारा नींद न आये तब माँ से, सुनने लगते … Read more

हम सब योग अपनाएं

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष……………. आओ भारत की संस्कृति का गौरव गान करें। ऋषि-मुनियों की इस परम्परा का बखान करें। योग को पूरी दुनिया ने अब अपना ही लिया, आज योग को मिलकर सारा हिन्दुस्तान करे। स्वस्थ बनने के लिए हम सब योग अपनाएं। योग से रोग मिटा कर खुद को स्वस्थ … Read more

रेलगाड़ी के गार्ड का डिब्बा

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** रेलगाड़ी के अंत में वो,मैं गार्ड का डिब्बा हूँ, किसी ओर की मंजिल को,मैं उससे बंधा हूँ। छूट गये निशानों को देखना ही मेरी फितरत, क्या हो रहा है आगे,यह देखने को अंधा हूँ। खींच ले रहे हैं शायद,ये आगे वाले ही मुझे, या उनके साथ,खुद घिसटता हुआ बंदा हूँ। … Read more

करें योग व्यायाम

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष……………. तन-मन और जीवन को आओ थोड़ा सरस बनाएं, करें योग व्यायाम ध्यान और जीवन को सरल बनाएं हम। जग में फैल रही कटुता पर योग ध्यान का लेप लगाएं, वाणी में भरकर मिठास नव जागृति का दीप जलाएं। कुंभ दंभ का फोड़ धरा पर होंठों … Read more

प्रतीक्षा

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* अपनी अनन्त यादों… तुम्हारे असंख्य वादों के साथ जी रही थी मैं। मन कहता रहा.. तुम आओगे…जरूर आओगे, एक दिन! जाते हुए कहा था तुमने… मिलते रहेंगे हम आगे भी, तुम्हारे वादे पर यकीन कर मैं आने वाले उस कल की करती रही… प्रतीक्षा। तुम्हारी औपचारिक बातों को… समझ … Read more

किसको बताएँ

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली *******************************************************************************  (रचना शिल्प:२२१२ २२१२ २२१२ २२१२) किसको बताएँ क्यों जहर जीवन में अब है भर गया, जलती हुई इस आग में वह राख सब कुछ कर गया। वादे सभी हैं खोखले,जब भी हवा थी कह रही, पर था समां ऐसा बना तब बिन कहे जग मर गया। थी जब चली उसकी सुनामी,बाँध … Read more

दोहरी जिंदगी

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* हर कोई है जी रहा लिए दोहरे रूप, हर इंसान का बदला हुआ है स्वरूप। हर रिश्ते से खेल रहा इंसान, बिक गया सबका ईमान। जार-जार हो रही मासूमियत, शर्मशार हो रही है आज इंसानियत। हर शख्स ने पहना है नकाब, इस मसले का नहीं है कोई जवाब। सबकी जिंदगी … Read more

नशा

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* ये दुनिया एक मयखाना है, जिसे देखो वही दीवाना है। शोहरत का कोई दौलत का, औरत का तो कोई मय का दीवाना है। खाने का तो कोई सोने का, किसी को पढ़ने का,हमको लिखने का नशा पुराना है। शोहरत जब जब बढ़ती है, नशा अहम का छा जाता … Read more

इच्छा किसान की

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** नहीं है इच्छा मैं अमीरों में गिना जाऊँ, नहीं है आशा मैं दुनिया की सैर पाऊँ। नहीं है इरादा मैं बैठा हुआ आराम करूँ, नहीं है कामना कि स्वर्ग पा हर्षाऊँ। नहीं भाता मैं गर्मियों में ए.सी. लगाऊँ, नहीं चाह कि मैं सर्दियों में हीटर लाऊँ। नहीं इच्छा … Read more