दहेज़

डॉ.रामावतार रैबारी मकवाना ‘आज़ाद पंछी’  भरतपुर(राजस्थान) ************************************************************************************************ आज भी लोग सरेआम दहेज़ लेते हैं, पर वो नालायक है बेटी वाले जो दहेज़ देते हैं फिर जिंदगीभर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं, कि बेटे वाले मेरी बेटी को दु:ख देते हैं। दबा देते हैं बेटियों को दहेज़ के तले, फिर बेटियाँ जिंदगी भर रोती हैं … Read more

खोज रहा नीर नेह

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान- २२ मात्रिक छंद-१२,१० मात्रा पर यति, यति से पूर्व व पश्चात त्रिकल अनिवार्य, चरणांत में गुरु (२),दो-दो चरण समतुकांत हों, चार चरण का एक छंद कहलाता है)  वरुण देव कृपा करे,जल भंडार भरें। जल से सब जीव बने,जल अंबार करें। दोहन मनुज ने किया,रहा जल बीत है। बिन अंबु … Read more

इंतजार-मीठा अहसास

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’  कोटा(राजस्थान) **************************************************************** इंतजार के एक-एक पल कितने मीठे होते हैं, जिनमें तुम होती हो और होती है तुम्हारी मीठी यादें, तुम्हारे दिल से निकले बेबाक शब्द जो फूटते हैं तुम्हारे होंठों से, किसी मीठे झरने की उन बूंदों की तरह, जो दौड़ पड़ती है, अपने प्रियतम सागर से मिलने के लिए, अपना … Read more

चुनाव का मुद्दा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** पक्ष-विपक्ष में बनते मुद्दे घोटालों के बनते मुद्दे, चारा घोटाला हो या कोयला घोटाला, दलदल में फँसी है राजनीति। भगौड़े बन जाते प्रवासी जगत में उतरते, वो करोड़ों का घोटला बनता है एक मुद्दा। रेलियों की लगी बड़ी होड़ पक्ष-विपक्ष के हाथों में, आए हैं अपने-अपने झण्डे, कच्चे चिठ्ठे मुँह के … Read more

ग़म के हजार घूँट

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** कितना बे’दर्द हो गया’ संसार देखिये, कोई नहीं है’ पूछता’ अखबार देखिये घायल तड़प रहा था’ वहाँ बीच सड़क पे- कारों की’ बिगड़ती हुई’ रफ्तार देखिये। जीवन गुजारना नहीं’ आसान अब यहाँ, सस्ता नहीं है’ एक भी’ सामान अब यहाँ सस्ती महज़ है’ जिंदगी’ यह घास की तरह- इंसान … Read more

अर्ध नारीश्वर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** तू नारी हम पुरुष, तू जीवन हम रूह तू जननी हम सर्जक, तू नव किसलय हम तरु तू श्रद्धा हम साधक, तू लज्जा हम वाहक तू ममता हम नायक, हम नौका तू पतवार तू करुणा हम साहस, तू कशिश हम अहसास, हम जीवन तू मुस्कान तू शक्ति हम … Read more

मुस्कान

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** अधरों पर दिख जाती है बस,वो मुस्कान नहीं होती है, खिले अधर ही खुशियों की,सच पहचान नहीं होती है। भूखे बच्चों के हाथों में,गर एक निवाला होता है, दीन-दुखी की कुटिया उसका,सत्य शिवाला होता है। बहू-बेटियों के रक्षण का,जब संकल्प लिया जाता है। घर के बड़े-बुजुर्गों को भी,उनका मान दिया … Read more

चुनाव

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** देखैं किसके सिर सजे, मोर मुकुट का पांख। कौन चले शेरों तरह, कौन दबाता आँख॥ लूटा है जिसने बहुत, पाकर के सरकार। वह नेता ही कह रहे, हम हैं पालनहार॥ अपने-अपने राग हैं, अपने-अपने दाँव। वो गाँव की बात करैं, नहिं देखा जो गाँव॥ जो महलों ने हैं जने, पाई … Read more

सागर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* सब नदियों का मीठा पानी, सागर में ही आता है। इसमें क्या गुण है ऐसा, जो ये खारा ही रह जाता है। मीलों तक फैला है फिर भी, प्यासा ये रह जाता है। इंसानी फ़ितरत भी ऐसी, सागर जैसा बन जाता है। अपने प्रिय की आँखों में, जो आँसू … Read more

आसमानी

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* चखना चाहती हूँ, नीले आसमाँ को। क्या वो भी होता होगा! सागर की तरह खारा। लहरें कभी मचलती होंगी वहाँ भी, चाँद के तट पर बैठकर, छूना चाहती हूँ लहरों को। कोई संगीत तो वहाँ भी, जरूर गुनगुनाता होगा। नर्म रेत पर कोई , अपने प्रेयस का नाम लिखता होगा। अपनी … Read more