घर की रौनक बच्चे

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** बच्चे मन के होते सच्चे, सुन्दर कृति ईश्वर की सौन्दर्यमय उनकी लीलाएं, मन मोहते,लोगों का। चहक-चहक कर फुदकने लगते, घर-आँगन में खुशियाँ बिखेरते मन भी उनके निर्मल होते, हृदय से सरस भाव झलकते। माता-पिता की आँखों का तारा, उनसे है जग में उजियारा नींद न आये तब माँ से, सुनने लगते … Read more

रेलगाड़ी के गार्ड का डिब्बा

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** रेलगाड़ी के अंत में वो,मैं गार्ड का डिब्बा हूँ, किसी ओर की मंजिल को,मैं उससे बंधा हूँ। छूट गये निशानों को देखना ही मेरी फितरत, क्या हो रहा है आगे,यह देखने को अंधा हूँ। खींच ले रहे हैं शायद,ये आगे वाले ही मुझे, या उनके साथ,खुद घिसटता हुआ बंदा हूँ। … Read more

करें योग व्यायाम

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष……………. तन-मन और जीवन को आओ थोड़ा सरस बनाएं, करें योग व्यायाम ध्यान और जीवन को सरल बनाएं हम। जग में फैल रही कटुता पर योग ध्यान का लेप लगाएं, वाणी में भरकर मिठास नव जागृति का दीप जलाएं। कुंभ दंभ का फोड़ धरा पर होंठों … Read more

प्रतीक्षा

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* अपनी अनन्त यादों… तुम्हारे असंख्य वादों के साथ जी रही थी मैं। मन कहता रहा.. तुम आओगे…जरूर आओगे, एक दिन! जाते हुए कहा था तुमने… मिलते रहेंगे हम आगे भी, तुम्हारे वादे पर यकीन कर मैं आने वाले उस कल की करती रही… प्रतीक्षा। तुम्हारी औपचारिक बातों को… समझ … Read more

दोहरी जिंदगी

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* हर कोई है जी रहा लिए दोहरे रूप, हर इंसान का बदला हुआ है स्वरूप। हर रिश्ते से खेल रहा इंसान, बिक गया सबका ईमान। जार-जार हो रही मासूमियत, शर्मशार हो रही है आज इंसानियत। हर शख्स ने पहना है नकाब, इस मसले का नहीं है कोई जवाब। सबकी जिंदगी … Read more

नशा

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* ये दुनिया एक मयखाना है, जिसे देखो वही दीवाना है। शोहरत का कोई दौलत का, औरत का तो कोई मय का दीवाना है। खाने का तो कोई सोने का, किसी को पढ़ने का,हमको लिखने का नशा पुराना है। शोहरत जब जब बढ़ती है, नशा अहम का छा जाता … Read more

इच्छा किसान की

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** नहीं है इच्छा मैं अमीरों में गिना जाऊँ, नहीं है आशा मैं दुनिया की सैर पाऊँ। नहीं है इरादा मैं बैठा हुआ आराम करूँ, नहीं है कामना कि स्वर्ग पा हर्षाऊँ। नहीं भाता मैं गर्मियों में ए.सी. लगाऊँ, नहीं चाह कि मैं सर्दियों में हीटर लाऊँ। नहीं इच्छा … Read more

मैं तलवार उठाऊंगा

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** दुष्कर्मी को फाँसी दो,वरना मैं तलवार उठाऊंगा, मासूम के हत्यारों को चौराहे पर मार गिराऊंगा। उम्रकैद की सजा सुनाकर,गुनाहगार को पाल रहे हो, ऐसे न्याय के देव के सम्मुख,मैं मस्तक नहीं झुकाऊंगा। नारी के हरण पर मौत हो वह युग पुनः मैं लाऊंगा, मैं भारत में देवी शक्ति … Read more

शरणार्थी भी है इंसान

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. शरण में आए, शरणार्थी बनकर लोकप्रियता निभाएं, मेहनती बनकर। प्रेम बढ़ाएं, मीठा बोलकर आस लगाए, शरण में रहकर। नमन किए हम, मिट्टी छू कर ईमानदारी दिखाई, सदा सच बोलकर। रूप सजाया, माली बनकर मानव बना मैं, सेवक बनकर। फूल उगाए, मिट्टी खोद कर एकता बनाई, गोली खाकर। … Read more

उड़ान

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ क्यों मैं ही हर बार दमन करूं, अपनी ख्वाहिशों का…? क्यों मैं ही हर बार दफन करूँ, अपनी ख्वाहिशों को…? अपने ही हाथों से क्यों घोट दूं गला, अपनी हर ख़्वाहिश का…? सदियों से, अब तक यही तो करती आई हूँ, घुट-घुट के जीती आई हूँ खोखली परम्पराओं में … Read more