इच्छा किसान की

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** नहीं है इच्छा मैं अमीरों में गिना जाऊँ, नहीं है आशा मैं दुनिया की सैर पाऊँ। नहीं है इरादा मैं बैठा हुआ आराम करूँ, नहीं है कामना कि स्वर्ग पा हर्षाऊँ। नहीं भाता मैं गर्मियों में ए.सी. लगाऊँ, नहीं चाह कि मैं सर्दियों में हीटर लाऊँ। नहीं इच्छा … Read more

मैं तलवार उठाऊंगा

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** दुष्कर्मी को फाँसी दो,वरना मैं तलवार उठाऊंगा, मासूम के हत्यारों को चौराहे पर मार गिराऊंगा। उम्रकैद की सजा सुनाकर,गुनाहगार को पाल रहे हो, ऐसे न्याय के देव के सम्मुख,मैं मस्तक नहीं झुकाऊंगा। नारी के हरण पर मौत हो वह युग पुनः मैं लाऊंगा, मैं भारत में देवी शक्ति … Read more

शरणार्थी भी है इंसान

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. शरण में आए, शरणार्थी बनकर लोकप्रियता निभाएं, मेहनती बनकर। प्रेम बढ़ाएं, मीठा बोलकर आस लगाए, शरण में रहकर। नमन किए हम, मिट्टी छू कर ईमानदारी दिखाई, सदा सच बोलकर। रूप सजाया, माली बनकर मानव बना मैं, सेवक बनकर। फूल उगाए, मिट्टी खोद कर एकता बनाई, गोली खाकर। … Read more

उड़ान

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ क्यों मैं ही हर बार दमन करूं, अपनी ख्वाहिशों का…? क्यों मैं ही हर बार दफन करूँ, अपनी ख्वाहिशों को…? अपने ही हाथों से क्यों घोट दूं गला, अपनी हर ख़्वाहिश का…? सदियों से, अब तक यही तो करती आई हूँ, घुट-घुट के जीती आई हूँ खोखली परम्पराओं में … Read more

प्रेम का नाता जोड़

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जब-जब युद्ध हुआ देशों में, तब-तब शरणार्थी संकट आया लोगों में। जीवन भी क्या चीज है, कहां से कहां पहुंच जाते हैं। एक बित्ता पेट के कारण, देश को भी छोड़ जाते हैं। सड़क मार्ग हो या समुद्री मार्ग, संकट से नहीं घबराते हैं। आंधी … Read more

वक्त

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** ऐ वक्त जब तक तू मेहरबान था, तब तक सारा ही जमाना मेरी मुट्ठी में बंद था। आज तू क्या रूठा, ये हसीन लगने वाला जहां रूठ गया देखते ही देखते, अपना ही कोई पराया हो गया। जख्म देने लगे वह,इतना सितम ढाया, बहारों के मौसम में पतझर छा गया। चाँदनी … Read more

कब तक…यूँ ही जीना होगा!

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. रब्बा तेरी दुनिया में, सब तेरी शरणायी हैं। तेरी छत्रछाया में फिर क्यों, हमने ही सजा पाई है। सब ही तो यहाँ शरणार्थी हैं, फिर हमको ही क्यों ? ये नाम मिला और क्यों, हम पर ये गाज गिराई। ना हमारा कोई ठौर-ठिकाना, ना जठराग्नि को … Read more

शरणार्थी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. मैं शरणार्थी हूँ, तेरे दर पर आया हूँ थोड़ी सी जगह दे दो, यह विनती करता हूँ। मेरा घर-द्वार छूट गया, मैं हाथ जोड़ता हूँ मुझे अपना लो तुम, यह विनती करता हूँ। सब-कुछ मेरा छूट गया, नाते-रिश्ते रूठ गए मेरे पास कुछ नहीं बचा, मुझे अपना … Read more

चाँदनी

प्रेक्षा डॉन गोधा ‘परी’ दुर्ग (छत्तीसगढ़) ************************************************************* चमचमाती चाँदनी भी, आज क्यों उदास है। किस वहशी ने तोड़ी कली, बुझाई अपनी प्यास है। चाँदनी आज अपनी, मजबूरियों पर रोई हैl कैसे समझाऊं उसे जिसने, अपनी संतान खोई है। क्या लिखे परी, उस चाँदनी के हालातl जो कई गुनाहों की गवाह है, न दे सकती बयानातll … Read more

मानवतावाद सत रहने का

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. बड़ा ही दु:खद होए पल, दु:ख-दर्द असमर्थता का जब ना हो कोई राह, जीवन रक्षा करने कीl अकाल भूख व युद्धजनक, बीमार तन-मन सहने का दयनीय स्थिति तड़पन भी, कातर आँखें,माँग शरण कीl देश हमारा है बड़ा अनोखा, संस्कृति उत्तम सदियों से बाँहें पसार … Read more