सूर्य तुम्हें ही बनना है
डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’ इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** नश्वर जग है आत्मदीप बन तुम्हें निरंतर जलना है, तम की घोर निशा के आगे सूर्य तुम्हें ही बनना है। करो साधना इष्टदेव की, पुण्य करो संचित केवल। स्वार्थ लोभ का त्याग करो तुम, ज्ञान भक्ति का ले संबल। भटक रहे हो जन्म-मरण के, चक्र का भेदन करना … Read more