प्रेमआँसू सप्तक
अनुपम आलोक उन्नाव(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** कुछ आँसू पीड़ा जनित,कुछ में हर्ष अपार। कुछ में राधा की विरह,कुछ कान्हा का प्यारll कुछ आँसू में दिख रहा,मीरा का विश्वास। कुछ आँसू कातर दिखे,द्रपुद सुता के पासll स्वारथ वश बहते दिखे,कुछ छलिया दृगकोष। कुछ नयनों से छलक कर,देते हैं संतोषll कुछ आँसू बहते मिले,जिनमें था संताप। कुछ! दोषी … Read more