मन का कवि शांत-सा

सविता सिंह दास सवि तेजपुर(असम) ************************************************************************* पता है, इन दिनों कुछ लिख नहीं पा रहीl रूठ गए हैं शायद, ये फूल,पौधे पहाड़,नदियाँ, धरा,अम्बर सबl कोई संवाद, नहीं कर रहा सब मौन हैंl और मेरी संवेदनाएँ, उन्हें क्या हुआ क्यों किसी पीड़ित या, निरीह के लिए द्रवित नहीं हो रहीl क्यों भावनाएँ, चूक रही है उभरते-उभरते, दम … Read more

आपको ढूंढता किधर साहब

गोविन्द कान्त झा ‘गोविन्द राकेश’ दलसिंहसराय (बिहार) *************************************************************** मैं उधर से गया ग़ुजर साहब, थी मनाही जहाँ जिधर साहब। आसमाँ में ही हैं उड़े फिरते, आपको ढूंढ़ता किधर साहबl शाम ढलते नहीं निकलता अब, आज भी तो लगे है डर साहबl हमको गुमनाम ही रखा जब तो, आता फिर कैसे मैं नज़र साहबl चौड़ी तो … Read more

चाहत

कुँवर प्रताप सिंह कुंवर बेचैन प्रतापगढ़ (राजस्थान) ********************************************************************** चाहा था हमने फूल बनना गुलिस्तां का, पर फूलों को तन्हा छोड़ देते हैं लोग। फूलों के लिए लाजमी है खिल के रहना, मुरझाते ही मुँह अपना मोड़ लेते हैं लोग। यूँ भी मुरझा जाना है चार दिन के बाद, पहले ही जाने क्यूँ फिर तोड़ लेते … Read more

ले जा तू सलाम मेरा

वन्दना शर्मा’वृन्दा’ अजमेर (राजस्थान) *********************************************************************** ससुराल से बेटी का सन्देश- पुरवइया जाना मेरे बाबुल के देश रे, ले जा रे सलाम मेरा ले जा सन्देश रे- थोड़ी धीमी-धीमी चलना,थोड़ी सहमी-सहमी चलना, घूँघट गोरी का उड़े न,मिट्टी आँख में गिरे न। तुझको अपना सा दिखेगा परिवेश रे… पुरवइया जाना- गाँव की सीमा पर मिलेगी,माता सती निहाली, … Read more

करवाचौथ

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** करवाचौथ व्रत है निराला, ‘करवा’ देता सीख महान सेवा प्रेम भक्ति का जल, चित्त में समाए, सदगुरु भेद बताएँ आत्म पति का हो ध्यान लगाएं, करवाचौथ व्रत का विधान। चौथ है चार क्रियाओं का ज्ञान, जो नर-नारी जाने वो महान परमप्रकाश है पति का रूप, अनहद नाद का है स्वर अमृत … Read more

गीत प्यार के गाऊंगा

जसवंतलाल खटीक राजसमन्द(राजस्थान) ************************************************************* करवा चौथ मनाऊंगा, मैं गीत प्यार के गाऊंगा। मैं भी तो अपनी सजनी के, खूब लाड़ लड़ाऊंगा॥ करवा चौथ मनाऊंगा… जब जब उसको देखता हूँ, मन खुश हो जाता मेरा। जब-जब उसके पास जाऊं, तो दिल बहल जाता मेरा। उसके अहसासों को मैं तो, गीत-ग़ज़ल में पिरोऊंगा॥ करवा चौथ मनाऊंगा… जब-जब … Read more

अमृत सुधा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  ********************************************************************************* समुद्र मंथन प्रसंग…………. तपता सूरज आग लगाये चन्द्र सुधा बरसाये, बहुत जरूरी है दोनों ही मानव जीवन पाये। मथा जलधि को देव दानवों ने घट विष का पाया, कैसे सृष्टि बचेगी इससे समझ यही नहीं आया। देवों की विनती सुन भोले जहर पी गये सारा, इस सृष्टि को घोर … Read more

कुछ लोग

शिवम द्विवेदी ‘शिवाय’  इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** ज़िन्दा हूँ मैं कुछ लोग जान गए, पागल हूँ मैं कुछ लोग मान गए क्या हुआ यदि वो हमें न समझे, लहज़े तो देखो खुद को जान गएl ये दूर की बातें हैं शिवम् हर शक्ल इंसान, बड़े किरदार का नहीं होता खुद तो हम कुछ नहीं कर सके, … Read more

कागज की नौका

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** माता का उपदेश नहीं बच्चे को कुछ भी भाया। बारिश में नौका लेकर पानी के बीच चलाया॥ बिनु पतवार कागजी नौका इधर-उधर बल खाती। कभी पास में आते-आते दूर बहुत हो जाती॥ लहरों के संग उठते-गिरते असमंजस हो जाता। नौका के संग बाल हृदय भी डूब-डूब उतराता॥ सहसा पीछे से … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* ‘आत्मजा’ खंडकाव्य से भाग-१२…….. दिन होते ही सेतु बनाती, जीवन में आगे जाने के रात सुखद सपनों में खोती, अंशुमान को अपनाने के। अलग-अलग थे दोनों ही पथ, दिन के और रात के अपने दिन में थे कुछ कार्य प्रायोगिक, और रात में ऊँचे सपने। कैसे जोड़े इन दोनों को, बहुत … Read more