जगराता

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** माता के दरबार में,जोत जले दिन-रात। आओ भक्तों कर चलो,माँ से सौ-सौ बात॥ जगराता में मातु का,मंदिर जगमग होय। दर्शन देते मातु है,अर्ज करे सब कोय॥ ढोलक बाजत साज है,नाचत है सब झूम। बालक वृद्ध जवान भी,देख रहे हैं घूम॥ जगराता करते सभी,रहते हैं उपवास। माता सबके दिल … Read more

शक्ति में भक्ति

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** आज मिली है शक्ति बन्दे कर ले माँ की भक्ति, किसने देखा कल क्या होगा सबने समय से बदली, आज मिली है शक्ति बन्दे कर ले माँ की भक्ति। जिसने भी स्नेह लगाया सब पे दया सुख आया, अष्टभुजा वाली,काली दुनिया को रखवाली, आज मिली है शक्ति बन्दे कर ले माँ … Read more

एक वजीर मात हो गया

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** मेरा जिंदगी को जीना कुछ खास हो गया, मेरा उठना-बैठना शायरों के साथ हो गया उन्होंने जाने क्या फिर मुझे वो तालीम दी, इश्क में मेरा रोना,बहर के साथ हो गया। दुनिया की चालों से कुछ हुआ मैं वाकिफ, मुझ पैदल से भी एक,वजीर मात हो गया मेरे दर्द की … Read more

माँ अम्बे

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** माता रानी दर पे आए, छोड़ आए हम सारे झमेले अब तू हमको शरण रख ले, निज चरणों में ले ले। माता रानी… कर त्रिशूल तलवार चमके, गले में सुन्दर हार दमके माथे पर बिंदिया कुमकुम, सिर पर माँ मुकुट लुभावे सजा हुआ दरबार है माँ, भक्तों के लगे हैं मेले। … Read more

साधु

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* ऐसे सच्चे साधु जन,जैसे सूप स्वभाव। यह तो बीती बात है,शेष बचा पहनाव। शेष बचा पहनाव,तिलक छापे ही खाली। जियें विलासी ठाठ,सुनें तो बात निराली। कहे ‘लाल’ कविराय,जुटाते भारी पैसे। सुरा सुन्दरी शान,बने स्वादू अब ऐसे। टोले साधु सनेह जन,चेले चेली संग। कार गाड़ियाँ काफिला,सुरा सुन्दरी भंग। सुरा सुन्दरी भंग,विलासी भाव … Read more

कर दे सब बुराईयों का अंत

डॉ.किशोर जॉन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************** अधर्म पर धर्म की जीत या पुण्य की पाप पर, बुराई पर अच्छाई की या असत्य पर सत्य की, पूज्यनीय है कर्म राम क़े पूज्यनीय है धर्मl विडम्बना मेरे अस्तित्व की समझ है मेरे चित की, है ये मान्यताओं का आधार आज राम है मंदिर में, और रावण है हमारे अंदरl … Read more

रावण के १० शीश

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* सोच रहा बालमन खेल-खेल में देख रावण के मुख,आँखें,दस शीश,और हाथ-पैर बीस, कैसे सोता होगा रावण,आती होगी कैसे नींद कैसे कहता होगा,कैसे करता होगा प्रीत। आज समझ में आया है,आनन है बस एक बाकी सब बीज॥ हैं प्रतीक बुराई के ये शीश,पाया भोले का था आशीष, बालमन भी … Read more

करीब और तुम जरा चले आओ…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** मेरी शाख के काँटों पे मत जाओ, मेरे करीब और तुम जरा चले आओ। मेरी पंखुड़ी छू के बहक जाओगे, मेरी खुशबू पा के महक जाओगे। मेरी शाख… मेरी बादशाही तो हर चमन में है, रंगत नहीं मुझ सी गुलशन में है। रंगत नहीं मुझ सी गुलशन में … Read more

माते अब मंगल कर दे

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* हे मातु भवानी,हे जगकल्याणी, महर तुम्हारी माँ आँचल भर दे। हे जन्मदात्री,हे सुखदायिनी, तू है माते अब मंगल कर दे। विद्या विवेक शक्ति है तुमसे, हृदय हमारे तेरी भक्ति भर दे। मातु वरदायिनी हो कृपासिंधु, मन व्याकुल माँ संकल्प भर दे। तुम्ही सर्वव्यापी जीवनदायिनी, नयनों मे मेरी वो … Read more

मानव मूल्य कहाँ बच पाए…

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** स्वार्थ परस्ती में बोलो अब, ‘मानव मूल्य कहाँ बच पाए’, मानव तो कहलाते हैं पर,मानवता हम कब रच पाए। नारी के शोषण पर बोलो,क्या आँखें नम होती हैं ? भूखे-नंगे बच्चों पर क्या,अपनी आँखें रोती हैं ? घर के बड़े-बुजुर्गों पर भी,हमको तरस नहीं आता, अग्रज और अनुज का भी … Read more