नया वर्ष-नया संकल्प-नया उत्साह

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* नव वर्ष विशेष…. ‘नेह निभाने आ गया,एक और नव वर्ष।आओ,हम आगे बढ़ें,लेकर मन में हर्ष॥’ हर नया साल कुछ नई उम्मीदें लेकर आता है और बहुत से लोग हर बार नववर्ष पर संकल्प करते हैं लेकिन इनमें से अधिकांश संकल्प टूट जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इनका टूटना लाजमी … Read more

वैवाहिक गठबंधन…

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* मेरे स्कूल-कॉलेज में साथ पढ़ने वाले लगभग सभी मित्रों की शादी हो चुकी थी,केवल मोहन बाकी रह गया था। जब भी दोस्तों की महफ़िल जमती ,सभी मिलकर उसकी हँसी उड़ाते रहते थे,पर वह कभी बुरा नहीं मानता था। कब शादी कर रहे हो,पूछने पर कहता कि भाई, देख तो रहा हूँ … Read more

‘इत्र’ की बदबूःराष्ट्रीय शिष्टाचार

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* इत्र से कितनी बदबू फैल सकती है,यह दुनिया को पहली बार पता चला। कन्नौज के इत्रवाले जैन परिवारों पर पड़े छापों ने इत्र के साथ उत्तरप्रदेश की राजनीति की बदबू को भी उजागर कर दिया है। सच्चाई तो यह है कि,इन छापों ने भारत की सारी राजनीति में फैली बदबू को सबके … Read more

किसने किस पर हद कर दी…!

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष….. हमारे देश के कृषक भी ऋृषि हैं कृषक भी तप करते हैं तपती धूप में,बारिश में। आंधी,तूफान व बाढ़ से जूझता है,अपने लहलहाते खलिहानों को प्रकृति की आपदाओं में तहस-नहस होते देख शांत भाव से देख कभी हौंसला नहीं गंवाया,न ही प्रकृति सौंदर्य को निहारने,संवारने … Read more

‘समाजवादी इत्र’ और इत्र का ‘भ्रष्टाचारी समाजवाद’..!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** उत्तर प्रदेश के कानपुर से राज्य में विधानसभा चु्नाव के पहले ‘भ्रष्टाचार के इत्र’ की जो कहानियां सामने आ रही हैं,वो किसी परी कथा-सी हैं। इक्कीसवीं सदी के विदा होते इक्कीसवें साल में शबाब पर है,वो भ्रष्टाचार है। जो कुछ घट रहा है,वो किसी दिवा स्वप्न के ‘साकार’ होने जैसा है। मसलन … Read more

‘मितव्ययिता’ मतलब कंजूसी नहीं

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** हमारी संस्कृति में मितव्ययिता व दानशीलता का बहुत महत्व है। मितव्ययिता हमें जीवन में सादगी,संयम,अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण सिखाती है,तो दानशीलता हमें सिखाती है कि सद्कार्य के लिए आवश्यकता के समय पर जो भी संभव हो,जितना भी संभव हो,अवश्य दें।याद रखें मितव्ययी का मतलब कंजूस नहीं होता है,बल्कि अनावश्यक खर्च न … Read more

नई शिक्षा नीति:नए पंख,नया आसमान

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* भारतवर्ष का पौराणिक इतिहास इतना गौरवपूर्ण रहा है कि इसके जिस क्षेत्र की चर्चा की जाए,वही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट व्यवस्था मानी जाती रही है । जो इतिहास का सत्य भी है। भारतवर्ष में प्रचलित शिक्षा व्यवस्था १९७८ तक भारत वर्ष में शिक्षा का बहुत ही सीमित दायरा था- सिविल, मैकेनिक,इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल और … Read more

धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून जरुरी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* कर्नाटक की विधानसभा ने धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून पारित कर दिया है। भाजपा ने उसका समर्थन किया है और कांग्रेस ने उसका विरोध! इस तरह के कानून भाजपा-शासित कई अन्य राज्यों ने भी बना दिए हैं और कुछ अन्य बनाने जा रहे हैं। कर्नाटक के इस कानून के विरोध में कई ईसाई संगठनों … Read more

नागरी के अग्रदूत ‘जस्टिस शारदाचरण मित्र’

डॉ. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)************************************* हिन्दी के योद्धा:जन्मदिन (२६ दिसंबर)विशेष कलकत्ता में जन्मे,कलकत्ता में पढ़े-लिखे, कलकत्ता विश्वविद्यालय से एक ही वर्ष में बी.ए. और एम.ए. की परीक्षा देकर दोनों में प्रथम स्थान प्राप्त करके कीर्तिमान बनाने वाले,मात्र २१ वर्ष की उम्र में अंग्रेजी के प्राध्यापक और बाद में कलकत्ता में न्यायाधीश रहे जस्टिस शारदाचरण मित्र(१७ दिसंबर … Read more

अबोध कली

स्मृति श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************************* सुबह उठकर पौधों के साथ समय बिताना राधा को बहुत पसंद है। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और ताजी हवा राधा को अंदर से ऊर्जावान कर देती है। इसलिए राधा अपने दिन की शुरुआत हमेशा बगीचे में समय बिता कर ही करती है। उस दिन भी राधा सुबह-सुबह अपने पौधों में पानी डाल … Read more