दिनकर

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* दिनकर दिनकर से हुए,हिन्दी हिन्द प्रकाश। तेज सूर जैसा रहा,तुलसी सा आभास॥ जन्म सिमरिया में लिये,सबसे बड़े प्रदेश। सूरज सम फैला किरण,छाए भारत देश॥ भूषण सा साहित्य ध्रुव,प्रेमचंद्र सा धीर। आजादी के हित लड़े,दिनकर कलम कबीर॥ भारत के गौरव बने,हिन्दी के सरताज। बने हिन्द के राष्ट्रकवि,हम कवि करते नाज॥ आजादी के … Read more

मौन अभी रहना होगा

वन्दना शर्मा’वृन्दा’ अजमेर (राजस्थान) *********************************************************************** मचल रहे तूफान कई, पर मौन अभी रहना होगा। सुनकर सबकी बात नुकीली, मुस्कान अधर गहना होगा। अथक,अडिग,अबाध गति से, प्रवाह हीन बहना होगा। मचने दे नीरव प्रलय को, विकल निशा जगना होगा। अभी नहीं ऋतु अनुकूल, हाथ पर सरसों नहीं उगा करती। सुअवसर आने दे ‘वृन्दा’, काँपेगा अम्बर-धरती। तब … Read more

फूल

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* रखूँ किस पृष्ठ के अंदर, अमानत प्यार की सँभले। भरी है डायरी पूरी, सहे जज्बात के हमले। गुलाबी फूल-सा दिल है, तुम्हारे प्यार में पागल- सहे ना फूल भी दिल भी, हकीकत हैं,नहीं जुमले। सुखों की खोज में मैंने, लिखे हैं गीत अफसाने। रचे हैं छंद भी सुंदर, भरोसे वक्त बहकाने। … Read more

माँ

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* साहित्य की पाठशाला (रचनाशिल्प:चार चरण २२ वर्ण प्रति चरण,१०-१२ वर्ण पर यति, चरणान्त गुरु,(२११×७) +२ (भगण×७)+गुरु,चारों चरण समतुकांतl) कर्ण महा तप तेज बली, २१ १२ ११ २१ १२ सुत मात तजे पर मात रखे। ११ २१ १२ ११ १२ १२ वीर सुयोधन मीत मिले, २१ १२११ २१ १२ नित भाव सहोदर … Read more

गांधी एक आदर्श पुरुष

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* आधुनिक दौर में मनुष्य के बीच से मनुष्यता धीरे-धीरे गायब होती दिख रही है। देश में हिंसा,पाप,अन्याय,अत्याचार,क्रूरता, असहिष्णुता,झूठ,पाखण्ड,भ्रष्टाचार,जाति-धर्म भेद आदि पहले से ज्यादा बढ़ा है। मनुष्य में अपने हित-अहित के बारे में सोचने का भी विवेक नष्ट हो रहा है। आजादी के पहले देश में हम राम राज्य की परिकल्पना … Read more

कलियुग

मोनिका शर्मा मुंबई(महाराष्ट्र) ***************************************************************** कलियुग, कौन जाने आखिर कैसा… यह कलियुग है आया ? जहाँ छत नहीं अब मजदूर की खातिर, न है कृषक को छाया। ‘अन्नदाता’ है वह कहलाता, जो उपज धान्य विश्व की खातिर पर अपना पेट ही भरने को, एक रोटी को वह तरस जाए। ‘मजदूर’ वह कहलाए, जो दूसरों के घर … Read more

हिंदी हर संबंध की चिट्ठी

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* हिंदी बिंदी से भाषा सुहागन हिंदी ज्ञान से विराट हर मन, हिंदी प्याला पी मदहोश सब मदहोशी को कहते जीवन। हिंदी मीरा का अमर प्याला हिंदी हल्दी घाटी का भाला, सूर में बसी कान्हा मुस्कान हिंदी तो बच्चन की है हाला। तुलसी का रामरसायन है रसखान का रस गायन … Read more

हिंदी भारत माँ की बिंदी है

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. यह कैसी शर्मिन्दी है, हिंदी भारत माँ की बिंदी है। अपनी ओर निहारो तुम, इसको जरा सँवारो तुम। भारती का सौंदर्य है यह, इसकी जग में बुलन्दी है॥ हिंदी भारत माँ… सरल विमल है जिसकी छवि, ज्योतिर्मय हो जैसे रवि। प्रकाश पुंज है भावों का, मर्यादा … Read more

सौतन

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. सौतन मेरे प्रिय सखे रचनाधर्मी, अशेष स्नेहाशीष। आज मैं अपनी पीर कहानी पत्र द्वारा तुम्हें बता रही हूँ,क्योंकि राजसभा में द्रौपदी से भी बदतर स्थिति है मेरी वर्तमान में। अब तो बस श्रीकृष्ण की तरह तुम्हारा ही भरोसा शेष है। इसी आशा और विश्वास से पत्र लिख … Read more

वैश्विक हिंदी और हम

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. किसी भी राष्ट्र की संस्कृति उस राष्ट्र की भाषा में निहित होती है। भाषा का अनुवाद मात्र करने से संस्कृति में परिवर्तन आ जाता है। हिंदी भाषा के ‘प्रणाम’ का बोध हमें अंग्रेजी भाषा के ‘गुड मार्निंग’ से नहीं होता। ‘क्षमा करना’ को ‘साॅरी’ शब्द कहना … Read more