नशा मुक्ति के लिए जागरूकता जरूरी

राजकुमार जैन ‘राजन’ आकोला (राजस्थान) ****************************************************** तम्बाकू और तंबाकूयुक्त नशीली वस्तुओं के साथ मादक पदार्थों का प्रयोग इन दिनों बहुत बढ़ गया है। बाजारों में जितनी दुकानें खाद्य पदार्थों की नहीं है,उससे अधिक नशे की वस्तुओं की हैं। एक बार नशे की गिरफ्त में आने के बाद संभलना बहुत मुश्किल हो जाता है,नशे की खुराक लगातार … Read more

सौगात

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** (रचनाशिल्प:१२२ १२२ १२२ १२२) नज़र की नज़र से मुलाकात होगी, दिलों की दिलों से तभी बात होगी। कभी जो नज़र ये हमारी मिलेगी, यकीनन सितारों भरी रात होगी। मिलेगी नज़र जब हमारी तुम्हारी, सुहानी सहर और जवां रात होगी। चलेंगे तुम्हें साथ लेकर सफ़र जो, हमारी डगर फूल बरसात … Read more

ऐसा पाठ पढ़ाना चाहिए

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** (रचनाशिल्प:रदीफ़-चाहिए, काफ़िया–आना) यूँ धरा से वृक्षों को नहीं मिटाना चाहिए। हरी-भरी धरती को मिलकर बचाना चाहिए। जाति-धर्म के नाम पर ज़ुदा न कर सके, एकता का ऐसा पाठ पढ़ाना चाहिए। नफ़रत हो जाए ख़त्म सबके दिलों से, एक-दूजे के दिल में प्यार बसाना चाहिए। जाग जाए दर्द का मीठा-सा एहसास, … Read more

जब तन्हा होती हूँ..

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ जब तन्हा होती हूँ, टूटती हूँ,बिखरती हूँ। परछाईं अपनी देखती हूँ, तब खुद से मिलती हूँ। तन्हाई को अपनी,शब्दों में गढ़ती हूँ, जब कुछ लिखती हूँ। खिलती हूँ, निखरती हूँ, रंग खुद में भरती हूँ। मैं फिर से सम्हलती हूँ, जब तन्हा होती हूँ…॥ परिचय-श्रीमती अंतुलता वर्मा का साहित्यिक … Read more

राजनीतिक गुस्से का प्रतिशोध प्रतिमाओं से क्यों ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** राजनीतिक आक्रोश या हताशा का प्रतिशोध महापुरूषों की प्रतिमाओं से लेना नई बात नहीं है,लेकिन देश की राजधानी नई दिल्ली में प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को तोड़े जाने का कोई औचित्य समझ नहीं आता,क्योंकि विवेकानंद न तो किसी दल के संस्थापक या प्रचारक थे,न … Read more

दिल ना दुखाना

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** बात बहुत जरा होती है, छुपती उभरती रहती है मैंने तुमको अपना माना, देखो मेरा दिल ना दुखानाl     अभी नया है प्यार हमारा, नई-नई पहचान है सूरज की किरणों जैसी, खिली-खिली मुस्कान है फिर मुझको ना आजमानाl देखो मेरा दिल…     मैंने अपनी जीवन रेखा, तुम्हारे संग में … Read more

‘विश्व बाल दिवस’ पर बड़ी स्पर्धा,१७ तक प्रविष्टी का मौका

नवोदितों को जीतने का विशेष मौका…….. इंदौर। लोकप्रिय मंच हिंदीभाषा डॉट कॉम (पोर्टल) से जुड़े सभी रचनाशिल्पियों (पंजीकृत सदस्य) और नवांकुरों के लिए स्पर्धा का क्रम सतत जारी है। इसी के तहत अब नवीं मासिक स्पर्धा कराई जा रही है। ‘विश्व बाल दिवस’ पर आधारित इस स्पर्धा के लिए किसी भी विधा में अपनी मौलिक … Read more

मजदूर या मजबूर…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** बैठा है इंतजार में, कृपा की तुम्हारे। भूखी आशा से, हर आने-जाने वाले को निहारे। हाथ में पकड़े है, कपड़े में बंधी दो मोटी-मोटी रोटियां, और प्याज। मन में है कई चिंताएं, बढ़ रहा है महाजन का चौगुनी गति से ब्याज। बच्चों की माँ ने कहा था … Read more

बिरसा मुंडा हैं आदिवासी तेजस्विता के नायक

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* बिरसा मुंडा जन्म जयन्ती-१५ नवम्बर विशेष…. किसी महापुरुष के कार्यों,अवदानों एवं जीवन का मूल्यांकन इस बात से होता है कि उन्होंने राष्ट्रीय एवं सामाजिक समस्याओं का समाधान किस सीमा तक किया,कितने कठोर संघर्षों से लोहा लिया। बिरसा मुंडा भी ऐसी ही एक युगांतरकारी शख्सियत थे,जिन्होंने आदिवासी जनजीवन के मसीहा के रूप … Read more

दिल जीत लेते हैं

सूरज कुमार साहू ‘नील` भोपाल (मध्यप्रदेश) ***************************************************************** हम वो लोग हैं जो अक्सर दिल जीत लेते हैंl अनजान हो या अपना,कर प्रीत लेते हैंl परिभाषा हमें प्यार की मत तुम समझाना,, आज के नहीं हम जो बना यूँ मीत लेते हैंl अनजान का घर हो या अपनों की महफ़िल, हम जा के खुद की नयी … Read more