हम भीड़ से बचते रहे

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचनाशिल्प:२२१२ २२१२) उनसे नहीं रिश्ते रहे, चुपचाप बस घुटते रहेl दुश्वारियाँ तो थीं मगर, बिंदास हम बढ़ते रहेl बेफ़िक्र मुझको देखकर, बाजू में सब चिढ़ते रहेl पत्थर लिये थे हाथ सब, हम भीड़ से बचते रहेl क्यों दुश्मनों को दोष दें, जब दोस्त ही लड़ते रहेl हँसने को थे मजबूर हम, … Read more

चंदा मामा

सुनील चौरसिया ‘सावन’ काशी(उत्तरप्रदेश) *********************************************** तारों की बरात लेकर, आ गये चन्दा मामा। दूल्हा बनकर दुनिया में छा गये चन्दा मामा॥ चन्दा मामा निकल पड़े हैं, मामी की तलाश में। दर-दर भटक रहे हैं देखो, बादल संग आकाश में॥ प्यारे-प्यारे सारे तारे, भूल गए हैं रास्ता। भटक गए हैं,लटक गए हैं, कैसे करेंगे नाश्ता॥ निशा-रानी … Read more

फिर जग में चित क्यों हारा है

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** ये कोमल हृदय तुम्हारा है, ये प्रिय आँखें तुम्हारी हैं। इनमें नीर की धारा है, इनमें जीवन का सार सारा है। फिर जग में चित क्यों हारा है ? जग पे चित क्यों हारा है…? ये तन का माया जाल है, सर के काले बाल हैं। ये जो मुझे रुप-रंग मिला … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-१५  बार-बार मस्तक पर दस्तक, दे-दे जाती उनको पत्नी द्वार खोल कर कभी झाँकते, फिर कर लेते बंद सिटकिनी। कभी सत्यता दिखती उनको, प्रिय पत्नी के सुदृढ़ कथन में कभी प्रभाती की सुयोग्यता, प्रगति सुनिश्चित करती मन में। दोनों सत्य खींचते क्रमश:, मची हृदय में रहती हलचल मन … Read more

जगन रेड्डी की उल्टी पट्टी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने सांप की बाॅबी में हाथ डाल दिया है। उन्होंने उप-राष्ट्रपति वेंकय्या नायडू,आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और आंध्र के अन्य नेताओं को अपने एक ऐसे तर्क में लपेट लिया है, जो मूलतः गलत है लेकिन जिसने सभी नेताओं की बोलती बंद कर दी … Read more

मैं जैसा हूँ

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** पागल हूँ मैं तो,अब मैं क्या करूँ अब नहीं अक्ल तो नहीं है अक्ल, जमाना तो यह बदलने से ही रहा नहीं बदलेगी अब यह मेरी शक्ल। हर शख्स लगा मुझे,मुझ जैसा फिर महफ़िल से मैं गया निकल, निजात मिले मुझे परेशानियों से तब दूंगा इनके फटे में,मैं दखल। कुछ … Read more

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह हुए स्मृति शेष

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** विश्वविख्यात वैज्ञानिक-गणितज्ञ आइंस्टीन और गौस के सिद्धांतों को चुनौती देकर प्रसिद्धि पाने वाले महान गणितज्ञ नहीं रहे। नासा में अपोलो मिशन शुरुआत के दौरान ३० कम्प्यूटर अचानक असफल हो गए,उसी क्षण पेन से सटीक जोड़ देकर अभियान सफल कराने वाले महान गणितज्ञ हमें छोड़कर चले गए। चक्रीय सदिश समष्टि सिद्धांत … Read more

एक कदम

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* प्रण लिया था,दुर्गम पथ पर जाने का,जीवन के नव निर्माण का, व्यवधान था मेरे स्वार्थी मित्रों का दुःख था उनसे विलग होने का, कैसे खण्डित करें घनिष्ठ मित्रता। जिसने कर दिया था स्व चिंतन नष्ट, विलगता देती थी महान कष्ट उदभवित हुए थे नव आधुनिकता के सभी गुण, जो सभ्य … Read more

शुभ `चिंतन` सब कीजिये

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** चिंतन- शुभ चिंतन सब कीजिये,मिले सभी फल चार। सादा स्वच्छ विचार से,बनता है व्यवहारll क्षमा- क्षमादान सबसे बड़ा,होता मेरे यार। दीन-हीन सब पर करो,मिले सभी को प्यारll प्रज्ञा- प्रज्ञा आप जगाइए,बनकर बुद्धिमान। पावोगे संसार में,सबसे फिर सम्मानll प्रचण्ड- ठंडी बड़ी प्रचण्ड है,कैसे बचे किसान। खेतों में मेहनत करे,धरे … Read more

व्यथित दीप

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ उत्सव-अनुष्ठानों में, मंगलदीप नाम से मुझे बिठाया था पूजा स्थान में- तुमने,श्रद्धा सुमन दिल से। आनन्द विभोर मैं, खुशी से नाचे मेरा शिखा हावया के- ताल तालों से, बिखरकर रश्मि तुम्हारें आँगन में। जला मेरा मुँह अग्निताप से- फिर भी,स्नेहाशीष दिया हूँ, तहे दिल से-सदा विराजे सुख-शांति तेरे संसार … Read more