माँ…एक रोटी

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** एक रोटी मुझे तू दे दे माँ, मेरे पेट की भूख मिटा दे… कितने दिनों से भूखी हूँ, फिर भी कभी न रोती हूँ। अब सहा नहीं जाता है माता, कैसे तुम्हें बताऊँ ? चन्द घण्टों की बात नहीं, कब तक तुमसे छुपाऊं। बेटी थोड़ा कर ले इंतजार, रोटी वाले भैया … Read more

समंदर कभी रोया नहीं करते

दिप्तेश तिवारी दिप रेवा (मध्यप्रदेश) **************************************************** काँटे हों हजारों मंजिलों की राह पर,यूँ घबराया नहीं करते, और पुरुष जो वीर होते हैं,यूँ मुश्किलों में हारा नही करते। न तेरे-न मेरे,यूँ वक्त तो नही किसी के हाथ में, जब मिले मौका तो लक्ष्य भेदो,यूँ मौके बार-बार नहीं मिलते।   कर्मयोगी कर्म से साधता है पर्वतों,चट्टानों को, हाथ … Read more

साँस है हिन्दी

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** हिन्दी धड़कन है साँस है हिन्दी, हिंदी तड़पन है अहसास है हिंदी। हिंदी माँ है हमारी और संस्कृति, जिसने पाला हमें,वह खास है हिंदी॥ भारतीय संस्कृति का निवास है हिंदी, परिधानों में भारतीयों का लिबास है हिंदी। हिंदुस्तानी भाषाई सुगंध फैल रही चारों ओर, हम सबमें अपनेपन का अहसास है हिंदी॥ … Read more

वादा

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** तुमसे कुछ कहना है… मौसम ने बहारों से, फूलों की वादियों से चाँद ने सितारों से और, सभी ने एक-दूसरे से वादा लिया है…। सुनो मैंने भी तुमसे वादा लिया है… संग तुम्हारे चलने का साथ तुम्हारा देने का, कभी ना दिल दुखाने का चोट ना पहुंचाने का वादा लिया है…। … Read more

ये वहम तुम्हारा अहम है

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** सिर्फ हम ही हम हैं, ये वहम तुम्हारा अहम है। आसमां में उड़ रहे हैं वो, जिनके लिए जमीं कम है। पिता सबसे अनमोल है जग में, बाहर से कठोर,अंदर से नरम है। तुम्हारे भाग्य का भागकर आएगा, मेहनत जी तोड़ करो,बाकी सब भरम है। अपना हर कदम मजबूती से … Read more

यही माँ

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ ‘माँ’ एक शब्द, धरती से धैर्यवान सहनशील उससे भी कहीं अधिक, लाड़-दुलार में किसी से तुलना नहीं, स्वंय कष्ट सहकर भी आँसू का घूंट पीकर भी, गीले बिस्तर पर सोकर भी आह तक करने न देती, माँ,जी हाँ ममता की मूर्ति माँ। उसकी क्षणिक आह पर स्वंय सिहर जाती, उसके … Read more

अहंकार

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* जब चले जीवन नैया लेकर, हाथों में मैं की पतवार सोचा,कर लेंगें जीवन नैया पार, पकड़ समय की धार। काम न आयी मैं की पतवार, तेज समय की धार अपने छूटे,सपने टूटे, कदर नहीं की अपनों की जब समय था तेरे पास। ऐसे गुजरे तूफ़ानों से, छूट गयीं … Read more

श्रेष्ठ मानव कहलाएगा

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** मानव को मानव से उपकार करेगा, वहीं इंसानों का भगवान कहलाएगा। न्योछावर कर दूसरों के लिए जिएगा, अनूठा प्रेम का संग्रह कर पाएगा॥ हृदय जितना विशाल होगा, वीरता की उतना मिसाल बनेगा। उपकार कर्म से जीवन सजेगा, खुशियों का चमन और महकेगा॥ शोषित पीड़ित वंचित को, मौलिक अधिकार दिलाएगा। … Read more

एक कविता यह भी…

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** सुरों में शब्द भर दो, भाव का मकरंद भर दो एक दिव्यानंद भर दो। शब्द जिसमें तथ्य हों, समूचे अनुभवों का शब्द हो मेरे उन कहकहों का, जो दर्द की अनुभूतियों में थे लगाए, पर आँखों से जो अश्क बनकर बह न पाए। अरे पगली शब्द लेकर क्या करोगी, खुद … Read more

तुम ही सारथी हो

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* अनजानी-सी रात है,पलभर की मुलाकात है, छोटी-सी दुनिया में,बड़ी-बड़ी बात है। आँखों में सपने हैं,पास नहीं अपने हैं, चलना है देखो अपनी राह पर,तेरा कर्म तेरे साथ है। बाकी सब स्वार्थ है,नश्वर है दुनिया, जीना-मरना इक बार है,मोह-माया सब निराधार है। नईया तेरी जिस ओर है,देख विपरीत पवन का शोर … Read more