कभी मेला करता रहा होगा गुफ्तगू…

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** रातों को सपनों में मेरे, गाँव कहीं इक आता है… जहाँ ‘कभी यादों का मेला रहा होगा।’ सूना-सूना-सा घट का पनघट, सूनी मन की चारदीवारी धड़कनों का जमघट लगता था, जिनसे ‘मैं गुफ्तगू करता था।’ हर रात चाँदनी की चादर ताने, तारों का मेला लगता था बदली झूला बनती थी, … Read more

विरह

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** आज दो अश्क नैनों से लिए जाते हो, तन्हा किसके भरोसे यूँ छोड़ आते हो। जब तक था साथ,लबों पर हँसी थी, आज सारी दुनिया में खो गई खुशी थी। क्यों हमें इस तरह गम दिए जाते हो, साँसों की डोर छोड़,कह देते हो। एक प्यार ही तो मांगा था मेरे … Read more

नयन से नीर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ख़ुशी-ख़ुशी जब गले मिले हम, तब भी बहते नयन से नीर। गम में भी तड़पें जो कभी हम, तब भी बहते नयन से नीर। ठंडी-ठंडी हवा चले जब, मन्द-मन्द मुस्काए। दिल में मचलती हैं उमंगें, नयन छलक ही जाएँ। हो मुहब्बत गर हमें उनसे, तड़पें दिन और रात। नयन … Read more

तालीम और सरकार

सोनू कुमार मिश्रा दरभंगा (बिहार) ************************************************************************* हसरतें तालीम की कभी आसान नहीं होती, तालीम बिन मनुज की कोई पहचान नहीं होती। तालीम बिन तकदीर की तस्वीर नहीं बदलती, तालीम हो तो मनुज की कभी पहचान नहीं मिटती। फिर क्यों तालीम को जालिम,जाहिल बनाने चले हैं… गरीबों से तालीम छीनने को फिर से वे अड़े हैं॥ … Read more

प्रकृति

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** बन के सूरज तू जगत में रौशनी की किरणें बिखरा, चाँद की शीतलता लेकर तू इस धरा पर आ। झील का तू नीर बन,जग में सबकी प्यास बुझा, कल-कल करते नदी के जल की स्वर लहरी घर-घर सुना। ऊंचे पर्वत शिखर-सा तू अपना जमीर ऊंचा उठा, आदमी को … Read more

सुबह और सूर्य

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** आज सूरज की बान का अंदाज़ अलग, कभी खुशियों की मुस्कान कभी नई सुबह,कहीं कुछ खो जाने की कशमकश, विरोधाभास की सुबह! ब्राह्मण के संतुलन की शक्ति, सृष्टि की निरन्तरता शाश्वत सत्य की अभिव्यक्ति, नारी शक्ति! प्रातःप्रभात का प्रखर प्रभाकर, प्रवाहमान है प्रथम लाली दिनकर की रक्त-सी किरणें, लगता … Read more

परिवर्तन

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा, विचारों में परिवर्तन आएगा भारत में स्वच्छता पर लोग काम करेंगे, जो कड़ियां टूट गई,उनको जोड़ा जाएगा… हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। नेता अच्छा काम करेंगे, भ्रष्टाचार का खात्मा करेंगे विचारों में समानता होगी, हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। काम बिना लिए-दिए होंगे, स्पष्ट बातें सब … Read more

महिमा बरसात की

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** अब तो हो जाने दो बरसात, तपन से धरा हो गई है त्रास। बुझ रही थी नहीं सभी की प्यास, बरसात होने से पूरी हुई आस। पानी के लिए मचा था हाहाकार, बरसात होने से आया करार। ह्रदय में धरती के पड़ रही थी दरार, बरसात के आने से आ … Read more

बंजारे-सी रातें

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* वक़्त के दामन से कुछ लम्हें चुरा कर, मैंने आज सोचा चलो इन लम्हों में ढूँढते हैं अपने खोये हुए दिन, गुज़री हुई रातें। वो बचपन की शरारतें वो जवानी की हसीं बातें, ज़िन्दगी की उलझनों में न जाने कहाँ खो गए…। कितनी जल्दी, फ़िसल जाता है रेत-सा वक़्त… वक़्त … Read more

जीवन का लेखा-जोखा

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ हनन और दमन तुम दूसरों का कर रहे हो, उसकी आग में अपने भी जल रहे हैं। कब तक तुम दूसरों को रुलाओगे, एक दिन इस आग में खुद भी जल जाओगे। कभी अपने किए पर बहुत पछताओगे, पर उस समय कुछ नहीं कर पाओगेl कहते हैं उसके घर में देर … Read more