धर्मयुद्ध
क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** जब रणभूमि में आ आमने-सामने शक्तियाँ धर्म अधर्म की टकरातीं हैं, योद्धाओं के सिंहनाद से यह धरा भयभीत होकर बार-बार थर्रातीं है। तब भी यदि कोई योद्धा किसी के बुलावे का मानो इंतज़ार करता है, देखे धर्म को लड़ते अधर्म से मात्र अपने ऊपर ही वह प्रहार करता है। हराने को … Read more