चली गिलहरी

डॉ.जियाउर रहमान जाफरी नालंदा (बिहार) *********************************************************************** चली गिलहरी कवि सम्मेलन में एक कविता पढ़ने, थी इच्छा सम्मान की इतनी लगी रातभर रटनेl आई जैसे ही माइक पर भूल गई वो रचना, उलट-पुलट वो पढ़कर आई सही-सही था पढ़नाl वहीं पे था एक बंदर बैठा बोला कवि जी सुनिए, आइंदा जब जाएं कहीं भी लिखकर उसको … Read more

सिसकता किसान

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** भंडार अन्नपूर्णा का बढ़ाएं, खेतों से काट फसलें जमा करता है खलिहान, कोटि-कोटि जनता का अन्नदाता है मगर अपने ही घर में, सिसकता किसान…,सिसकता किसानl दारिद्रय जिसकी व्यथा रही, क्या कहे वह अपनी अनकही कर्ज़ों के बोझ तले, हृदय में शूल गड़े संयम पे वश ना चले, राह कोई … Read more

मुझे तुम याद आते हो

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* यूँ ही बिन मौसम की बरसातें मेरी छत पर टप-टप करती बूंदें जहन में जाने कैसी हुलस-सी, जब भर जाती हैं मुझे तुम याद आते हो…। घड़ी-घड़ी तुम्हारी राह तकती बेसब्र आँखें,हर शय में जब तुम्हें ही तलाशती हैं, मुझे तुम याद आते हो…। भीगे से मन की देहरी पर डेरा … Read more

कीजिए खूब ‘मतदान’

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* कीजिए मिलकर प्रेम से,खूब मतदान, बनेगा इसी से अपना भारत देश महान। बेहतर भविष्य चाहिए, ‘मत’ दे आईए, नेताओं को समझिए,देशहित सोचिए। बदलाव लाना है तो कदम बढ़ाने होंगे, ‘मत’ अमूल्य है,कभी जाया न कीजिए। सोचें जो क्षेत्र-देश की, ‘मत’ उसे ही दीजिए, दागियों को सीधे अब ‘पराजित’ कीजिए। अपराधियों … Read more

महापर्व-मतदान️ करें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** क्या आपने मतदान किया ? मित्रों,हाँ हमने मतदान किया, मत के न केवल अधिकारी हम वरन् कर्तव्यनिष्ठ जाग्त सशक्त, सतर्क सदा तत्पर प्रबुद्ध हम प्रजा प्रबल हैं हस्ताक्षर, है यह लोकतंत्र का महापर्व तभी शक्ति समुन्नत होंगे, सदभाव शान्ति व नीति प्रीति हो शिक्षित समदर्शी लोकपाल, जनप्रतिनिधि चयन … Read more

छुट्टी गर्मी की

अविनाश तिवारी ‘अवि’ अमोरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************************ लो हो गयी छुट्टियां गर्मियों की, मन में जगी आस अपनों से मिलने उत्सुक है होगी मीठी बातl कुछ शादियों में जायेंगे जमकर धूम मचाएंगे, बच्चे नाना-नानी को नाकों चने चबाएंगे दादा-दादी से मिलकर सुनेंगे नई कहानी, टीवी होगा अपना बेट-बल्ला होगा जानी नहीं घूरेंगे मम्मी-पापा,चलेगी अपनी मनमानीl छुपम-छुपाई खेलेंगे … Read more

आतंक और दो बूंद आँसू

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** उफ़्फ़!! क्या लिखूँ….? कैसे लिखूँ….? इस अबोध की भाँति आज, कलम हमारी थम गयी। देखकर यह तस्वीर रातभर मैं सो नहीं पाया, आँखों से आँसू रोक न पाया क्योंकि मेरा जमीर है जिंदा, मेरी भवनाएं संवेदना है जिंदा कौन होगा ? जो यह दृश्य देख न रोया होगा, क्या … Read more

क्या हश्र हुआ !

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* उनका प्यार पाने की मेरी कोशिशों का कुछ ना हुआ, मेरी मौत पर कहा-लग ही गयी,आखिर बददुआ। मुझे भी करना ही पड़ा,फिर शुक्रिया अदा उनका, उनका दिया कुछ तो था वो,जो मेरा अपना ही हुआ। मुझे देखकर छुप जाने की,नहीं जायेगी उनकी आदत इसी कोशिश में लगी रहीं,जबसे जनाजे में … Read more

दिल से देता हूँ वोट..

जसवंतलाल खटीक राजसमन्द(राजस्थान) ************************************************************* मैं सबको सुनाता हूँ लेकिन,मैं हूँ बहरा किसी की नहीं सुनता मैं ये,आज कह रहा। मैं दिल से देता हूँ वोट,पैसों से नहीं, मेरा वोट है मेरा हक,शान से कह रहा॥ ये चुनावी हथकंडे हैं,ये तो रोज आएंगे, ये हाथों को जोड़ कर,हमारे पाँव दबाएंगे। इन लोगों की बातों में,तुम कभी … Read more

गर्मी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** सर्दी जाती गर्मी आती, शुरू शुरू में यह सबको भाती। स्वेटर रजाई को दूर भगाती, जब वह अपने रंग में आती… सबको वह पूरा पूरा सताती॥ सूरज का रहता है प्रचंड रूप, बेहाल करता है जीवो को इसका धूप। बचने को ढूंढते हैं सब सुंदर छाया, कम ना … Read more